नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची आंतरिक कलह अब पूरी तरह सामने आ गई है. पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली बारासात की वरिष्ठ सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है. इस इस्तीफे के तुरंत बाद वे तृणमूल के छह अन्य मौजूदा विधायकों के साथ मंगलवार को कल्याणी में आयोजित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की हाई-लेवल प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मंच पर दिखाई दीं.
कल्याणी में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सरकारी मंच पर काकोली घोष दस्तीदार की मौजूदगी ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. पिछले कुछ समय से टीएमसी के भीतर अपने साथ हो रहे सौतेले व्यवहार को लेकर वे सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर कर रही थीं. इसी कड़वाहट के चलते उन्होंने पहले ही पार्टी में मिले पदों को त्याग दिया था. अब भाजपा सरकार के आधिकारिक कार्यक्रम में उनकी यह सीधी भागीदारी बंगाल के बदलते सियासी समीकरणों की गवाह बनी है.
इस प्रशासनिक बैठक में केवल बारासात की सांसद ही नहीं बल्कि टीएमसी के छह विधायक भी मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करते नजर आए. इनमें देगंगा क्षेत्र से तृणमूल विधायक अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर से बीना मंडल और हारोआ विधानसभा सीट से विधायक मोहम्मद अब्दुल मतीन मुख्य रूप से शामिल थे. इनके अलावा बशीरहाट संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तीन अन्य विधायकों ने भी इस बैठक में हिस्सा लेकर ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
काकोली घोष दस्तीदार के इस बड़े कदम पर टीएमसी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा किया है. उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, 'आपकी आगे की राजनीतिक यात्रा बेहद सुगम और सुखद हो. शायद अब नई पार्टी में जाने के बाद आपके ऊपर लगे पुराने सभी दाग और वित्तीय विवाद हमेशा के लिए धुल जाएंगे. उम्मीद है कि यह नया अध्याय आपके उन सभी असफल प्रयासों को पूरा करेगा.'