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India Daily

भारत के लिए बजी खतरे की घंटी, पैंगोंग त्सो के पास चीन ने तेज किया निर्माण, सैटेलाइट तस्वीर में हुआ खुलासा

हालांकि ये निर्माण चीन के कब्जे वाले क्षेत्र में बताए जा रहे हैं, लेकिन इनकी लोकेशन और तेजी ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
भारत के लिए बजी खतरे की घंटी, पैंगोंग त्सो के पास चीन ने तेज किया निर्माण, सैटेलाइट तस्वीर में हुआ खुलासा
Courtesy: x

लद्दाख में भारत-चीन सीमा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है. ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा हुआ है कि चीन पैंगोंग त्सो झील के पास बफर जोन के नजदीक स्थायी ढांचे बना रहा है. हालांकि ये निर्माण चीन के कब्जे वाले क्षेत्र में बताए जा रहे हैं, लेकिन इनकी लोकेशन और तेजी ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है.

गलवान के बाद चीन की नई रणनीति?

भू-रणनीतिक विशेषज्ञ डेमियन सायमन ने सोशल मीडिया पर यह सैटेलाइट इमेज साझा की है. उनके मुताबिक, यह निर्माण 2020 के गलवान संघर्ष के बाद चीन की बदली हुई रणनीति की ओर इशारा करता है. उनका कहना है कि भले ही ये गतिविधियां तकनीकी रूप से चीनी क्षेत्र में हों, लेकिन इससे बीजिंग अपनी भौतिक मौजूदगी को मजबूत कर रहा है और क्षेत्रीय दावों को नए सिरे से संतुलित करने की कोशिश कर रहा है.

कहां हो रहा है निर्माण

तस्वीरों के अनुसार, यह निर्माण एक पियर और सैनिकों के ठहरने वाले इलाकों के पास हो रहा है. यह इलाका बफर जोन के ठीक आगे स्थित पहले पीएलए (चीनी सेना) पोस्ट के करीब है. जानकारों का मानना है कि स्थायी ढांचे भविष्य में सैन्य गतिविधियों को और आसान बना सकते हैं.

द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट में क्या कहा गया

एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, चीन इस संवेदनशील इलाके में भारत की तुलना में चार गुना तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है. हालांकि, भारतीय और पश्चिमी अधिकारियों का कहना है कि 2024 के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत बढ़ी है, जिससे तनाव में कुछ कमी जरूर आई है.

एलएसी पर फिलहाल शांति, लेकिन सतर्कता जरूरी

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी पर फिलहाल नाजुक शांति बनी हुई है. दोनों देशों की पेट्रोलिंग दोबारा शुरू हो चुकी है और स्थानीय कमांडरों के बीच नियमित संपर्क भी है. कुछ जगहों पर सैनिकों के बीच हाथ हिलाकर अभिवादन जैसी घटनाएं भी देखी गई हैं.

भारत की रणनीतिक मजबूती

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने एलएसी से दो ब्रिगेड पाकिस्तान सीमा की ओर भेजीं, जिससे यह संकेत मिला कि हालात उस समय नियंत्रण में थे. फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि पैंगोंग त्सो के पास हो रहा यह निर्माण भविष्य के लिए चेतावनी है. भारत के लिए जरूरी है कि वह कूटनीति के साथ-साथ सुरक्षा तैयारियों को भी पूरी मजबूती से बनाए रखे.