मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ती ही जा रहा है. ईरान ने कुछ समय पहले सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफाइनरी रास तनुरा पर हमला किया. जिसके बाद सऊदी अरामको ने एहतियाती तौर पर इसे बंद करने का फैसला लिया है. हालांकि सऊदी रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक दो ड्रोन रोक लिए गए.
सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपनी मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि ड्रोन हमले के बाद इनके मलबे से थोड़ी आग लग गई, हालांकि कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि स्थिति बिल्कुल कंट्रोल में है. लेकिन रिफाइनरी को सुरक्षित रखने के लिए इसे बंद कर दिया गया है.
रास तनुरा रिफाइनरी सऊदी अरब की खाड़ी तट पर स्थित है. जिसकी क्षमता 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन का है , सऊदी क्रूड ऑयल का प्रमुख निर्यात केंद्र भी है. इस हमले के बाद तेल सप्लाई की चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई है. मिल रही जानकारी के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य पर तीन टैंकरों को निशाना बनाया गया. यह मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत क्रूड ऑयल सप्लाई करता है.
इससे वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकता है. रिस्क इंटेलिजेंस फर्म वेरिस्क मैपलक्रॉफ्ट के मिडिल ईस्ट एनालिस्ट टोरबजॉर्न सोल्टवेड्ट ने रॉयटर्स को कहा कि यह हमला बड़ा कदम है. गल्फ का ऊर्जा ढांचा अब ईरान के निशाने पर हैं. इससे सऊदी अरब और अन्य गल्फ देश अमेरिका-इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं.
ईरान द्वारा केवल सऊदी अरब नहीं बल्कि अबू धाबी, दुबई, दोहा, मनामा और ओमान के पोर्ट पर भी हमले किए गए. जंग के माहौल को देखते हुए इराक के कुर्दिस्तान में तेल उत्पादन बंद कर दिया गया है. हमले के बाद तेल की कीमतों में तेजी से उछाल देखने को मिला है. जानकारी के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 79.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा गया. तेल के महंगा होने से आम लोग प्रभावित होंगे. कई देश पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं, ऐसे में यह स्थिति माहौल को और भी ज्यादा खराब कर सकती है. सुप्रीम नेता के निधन के बाद ईरान में तनाव बढ़ा हुआ है.