नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को वर्ली में एक खचाखच भरे ऑडिटोरियम में कहा कि चुनावी सूचियों के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR जैसे अभ्यास घुसपैठियों की पहचान करने में मदद कर रहे हैं, लेकिन नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए. संदिग्धों की पहचान करनी चाहिए और अधिकारियों को उनकी रिपोर्ट करनी चाहिए. उन्हें नौकरी न देकर आर्थिक रूप से उनका बहिष्कार करना चाहिए.
जो लोग बाहर से आते हैं, उन्हें उनकी भाषा से पहचाना जा सकता है. हमें उन्हें पहचानना चाहिए और उचित अधिकारियों को उनकी रिपोर्ट करनी चाहिए. वे जांच करेंगे और उन पर नजर रखेंगे. भागवत ने NSCI डोम में कुछ शीर्ष उद्योगपतियों और फिल्म सितारों सहित 900 लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, यह बात उन्होंने RSS की शताब्दी मनाने के लिए दो दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन कही.
उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने घुसपैठियों के बारे में कुछ नहीं किया था, जबकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने उन्हें पहचानना और देश से बाहर निकालना शुरू कर दिया है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रक्रिया और तेज होगी.
केंद्र में मोदी सरकार और महाराष्ट्र में महायुति सरकार सहित कई बीजेपी शासित राज्य सरकारों ने हाल के महीनों में हजारों संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को गिरफ्तार/देश से बाहर निकाला है लेकिन मानवाधिकार समूहों और विपक्षी दलों का आरोप है कि इस अभियान के तहत पश्चिम बंगाल के कई कानून का पालन करने वाले बांग्ला भाषी नागरिकों को गलत तरीके से निशाना बनाया गया है.
जनगणना की जा रही है जिसके बाद SIR होगा. जो भारतीय नहीं हैं, उनकी पहचान शुरू हो गई है. इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपने आप हटा दिया जाएगा, भागवत ने लोगों से सतर्क रहकर इस प्रक्रिया में योगदान देने का आग्रह किया.
'अगर आप अपने आस-पास देखेंगे, तो आपको वे यानी घुसपैठिए आपके कर्मचारियों के रूप में छोटे-मोटे काम करते हुए मिल जाएंगे. हिंदू समुदाय के लोगों ने छोटे-मोटे काम करना बंद कर दिया है क्योंकि वे ज्यादा कमाई वाली नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं. इससे एक खालीपन पैदा हो गया है जिससे घुसपैठियों को नौकरियां मिल रही हैं.' RSS प्रमुख ने कहा, 'हम किसी भी विदेशी को रोजगार नहीं देंगे. जो भी हमारे देश का है, चाहे वह मुस्लिम हो उसे रोजगार मिलेगा लेकिन किसी विदेशी को नहीं.'