Parliament Monsoon Session: '22 मिनट में 22 अप्रैल का बदला', ऑपरेशन सिंदूर पर नड्डा ने विपक्ष को घेरा

राज्यसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा के दौरान जेपी नड्डा ने यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि 2005 और 2006 में हुए आतंकी हमलों के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने इसे सरकार की असंवेदनशीलता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी बताया. साथ ही, पाकिस्तान के साथ जारी व्यापार और पर्यटन को लेकर भी सवाल उठाए.

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Parliament Monsoon Session: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार दोपहर राज्यसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा के दौरान पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि भारत पर हुए गंभीर आतंकी हमलों के बाद तत्कालीन सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और असंवेदनशीलता को दर्शाती है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नड्डा ने दोपहर 3 बजे राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि वर्ष 2005 में दिल्ली, 2006 में वाराणसी और मुंबई लोकल ट्रेन विस्फोट जैसे बड़े आतंकी हमलों के बाद भी यूपीए सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. नड्डा ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह सशस्त्र बलों को दिशा देता है. उन्होंने यूपीए शासन को गैर-प्रतिक्रियाशील और निष्क्रिय करार दिया.

 

व्यापार और पर्यटन संबंधों की आलोचना

जेपी नड्डा ने पाकिस्तान के साथ उस समय भी जारी रहे व्यापार और पर्यटन संबंधों की आलोचना करते हुए कहा कि जब देश पर आतंकी हमले हो रहे थे, तब भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार और पर्यटन चलता रहा. यह दिखाता है कि उस समय सरकार में आतंकवाद से निपटने की गंभीरता की कमी थी.

सुरक्षा को चुनौती

उन्होंने कहा कि आज जब भारत की सीमा पार से सुरक्षा को चुनौती मिलती है, तो जवाब "ऑपरेशन सिंदूर" जैसा निर्णायक होता है. सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हर पहलू पर तेज, कठोर और जवाबदेह कार्रवाई हो.
बाद में शाम 4 बजे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ऑपरेशन सिंदूर पर राज्यसभा में चर्चा में भाग लिया और सरकार के रुख को स्पष्ट किया.

राष्ट्र सुरक्षा पर सख्त नीति 

राज्यसभा में चल रही इस बहस के दौरान भाजपा सरकार ऑपरेशन सिंदूर को भारत की राष्ट्र सुरक्षा पर सख्त नीति के रूप में प्रस्तुत कर रही है. वहीं विपक्ष पर आरोप है कि उन्होंने अपने शासनकाल में ऐसे हमलों के बावजूद देश को निर्णायक नेतृत्व से वंचित रखा. जेपी नड्डा की यह टिप्पणी इस समय महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब भारत वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के लिए अपनी छवि बना रहा है.