कांग्रेस (Congress) के दिग्गज नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि लाखों लोगों के मेहनत की कमाई दांव पर है, लोग शेयर बाजार में पैसे दांव पर लगा रहे हैं, ऐसे में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर जनता को आगाह करना मेरा दायित्व है. उन्होंने SEBI की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं, साथ ही चेयर पर्सन माधबी पुरी पुच का वे इस्तीफा मांग रहे हैं. राहुल गांधी का कहना है कि इस स्कैंडल की जांच होनी चाहिए क्योंकि हिंडगनबर्ग ने अपने रिपोर्ट में कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. राहुल गांधी के इन बयानों पर हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद और बॉलीवुड सुपरस्टार कंगना रनौत भड़क गई हैं.
कंगना रनौत ने कहा है कि राहुल गांधी के व्यक्तित्व में जहर घुला है और वे प्रधानमंत्री अगर नहीं बनते हैं तो देश को तहस-नहस कर देंगे. उन्होंने राहुल गांधी पर जमकर अपनी भड़ास निकाली है. कंगना ने कहा, 'राहुल गांधी बेहद खतरनाक इंसान हैं, वे तीखे हैं, जहरीले हैं और विध्वंसक हैं. उनका ये एजेंडा है कि अगर वे हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री नहीं बनते हैं तो वे देश को तबाह कर देते हैं.'
कंगना रनौत ने कहा, 'हिंडनगबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में स्टॉक मार्केट को निशान बानाया है. राहुल गांधी का समर्थन करना बेकार बात है. वह इस देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. वे देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं.'
कंगना ने कहा, 'राहुल गांधी आप विपक्ष में बैठने के लिए आजीवन तैयार रहिए. आप पीड़ित हैं, इस देश के लोगों की महानता, विकास और राष्ट्रवादी नजरिए को भुगतने के लिए तैयार रहिए. वे आपको कभी अपना नेता नहीं बनाएंगे. आप एक कलंक हैं.'
Rahul Gandhi is the most dangerous man, he is bitter, poisonous and destructive, his agenda is that if he can't be the Prime Minister then he might as well destroy this nation.
— Kangana Ranaut (@KanganaTeam) August 12, 2024
Hindenberg report targeting our stock market that Rahul Gandhi was endorsing last night has turned out…
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी पुच, अडानी की ग्रुप के वित्तीय अनियमितताओं वाली कंपनियों में हिस्सेदारी रही है. ये ऑफशोर कंपनिां हैं. सेबी ने इसी वजह से उन शेयरहोल्डर कंपनियों पर कोई एक्शन नहीं लिया है, जो इंडिया इन्फोलाइन की ईएम रिसर्जेंच फंड और इंडिया फोकस फंड की ओर से संचालित की जा रही हैं. अब ऐसी स्थिति में SEBI की कार्यप्रणाली संदिग्ध है. लाखों निवेशकों के पैसे दांव पर लगे हुए हैं. इसी रिपोर्ट को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार, सेबी और देश की बड़ी संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं.