पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के नतीजे आज जारी हो रहे हैं. भारत निर्वाचन आयोग की ओर से सभी तैयारी हो चुकी है, अब शाम तक पूरा ग्राफ साफ हो जाएगा. धीरे-धीरे एक एक-सीटों के नतीजे आ रहे हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि करोड़ों आबादी वाले देश में चुनाव प्रक्रिया क्या है? कैसे एक-एक वोटों को गिना जाता है. आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा प्रोसेस
मतगणना से एक दिन पहले जिला निर्वाचन अधिकारी और चुनाव पर्यवेक्षक सारी तैयारियां पूरी कर लेते हैं. हर अधिकारी और कर्मचारी को ड्यूटी दे दिया जाता है. राजनीतिक पार्टियां भी अपने प्रतिनिधियों को मतगणना केंद्रों पर तैनात करते हैं. ताकी पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जा सके. मतदान के बाद ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी में स्ट्रांग रूम में रखा जाता है. उम्मीदवारों के एजेंट भी वहां नजर रख सकते हैं.
प्रत्येक जिले में एक मुख्य मतगणना केंद्र बनाया जाता है. यहां कई टेबलें लगाई जाती हैं. हर टेबल पर काउंटिंग सुपरवाइजर, सहायक और माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात रहते हैं. सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं. केवल अधिकृत व्यक्ति ही अंदर प्रवेश कर सकते हैं. सभी के लिए पहचान पत्र अनिवार्य होता है.
सीसीटीवी कैमरे पूरे केंद्र पर नजर रखते हैं, जिससे कोई गड़बड़ी की गुंजाइश संभव नहीं है. मतगणना सुबह से ही शुरू हो जाती है. सबसे पहले पोस्टल बैलेट को गिना जाता है. इनमें सेना के जवान, सरकारी कर्मचारी और सेवा मतदाताओं के वोट शामिल होते हैं. हर बैलेट की सावधानीपूर्वक जांच होती है. यदि पोस्टल बैलेट की संख्या ज्यादा होती है तो शुरुआती रुझानों पर इसका असर पड़ सकता है. इनके परिणाम सबसे पहले घोषित किए जाते हैं.
पोस्टल बैलेट के बाद ईवीएम की गिनती शुरू होती है. कंट्रोल यूनिट से वोट निकाले जाते हैं. प्रत्येक राउंड के बाद आंकड़े दर्ज किए जाते हैं और उम्मीदवारों के एजेंट उन्हें देख सकते हैं. कुल वोट जोड़कर आगे-पीछे की स्थिति साफ होती जाती है. मीडिया शुरुआती रुझान दिखाता है, लेकिन ये अंतिम नतीजे काफी अलग भी हो सकते हैं. निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम पांच वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाता है.
यह ईवीएम वोटों के साथ वीवीपैट पर्चियों की जांच के बाद होता है. यदि कोई अंतर पाया जाता है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है. सभी राउंड पूरे होने के बाद रिटर्निंग अधिकारी अंतिम परिणाम घोषित करते हैं. जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वैध वोट मिलते हैं, वही विजयी घोषित होता है. उसे तुरंत प्रमाण-पत्र भी सौंप दिया जाता है. यदि दो उम्मीदवारों के वोट बराबर हो जाएं तो लॉटरी या ड्रॉ के जरिए फैसला लिया जाता है. यह सबकुछ ट्रांसपेरेंट तरीके से किया जाता है.