लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को कथित NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा शिक्षा संकट और पेपर लीक की घटनाओं की जिम्मेदारी उन्हीं पर है. राहुल ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित किया है.
राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा व्यवस्था के "पूरी तरह विफल होने का प्रतीक" बन चुके हैं और उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के पीछे सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं. कांग्रेस नेता ने कहा कि युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए सरकार को सबसे पहले जवाबदेही तय करनी होगी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखीं. पहली, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए. दूसरी, प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. तीसरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन युवाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, जिनका भविष्य कथित परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित हुआ है.
राहुल गांधी अपने साथ एक ऐसे छात्र को भी लेकर आए, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान वह कथित रूप से पेलेट गन की चपेट में आकर घायल हुआ. राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार ने पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया, जबकि छात्र की आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
#WATCH | LoP, Lok Sabha, Rahul Gandhi brings before the media a man he claims suffered pellet gun injuries during students' protest
— ANI (@ANI) July 24, 2026
He says, "I want to explain that my brother standing here was injured by a pellet gun while he was peacefully protesting, holding the Tricolour.… pic.twitter.com/TCQJ4OZJcu
इस बीच केंद्र सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे Cockroach Janta Party (CJP) के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की है और उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है. सरकार पहले ही पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने की घोषणा कर चुकी है. आंदोलन के बीच दोनों पक्षों के बीच आगे भी वार्ता जारी रहने की संभावना है.