पुणे पोर्शे कांड मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है. 900 पन्नों की चार्जशीट में बिल्डर के बेटे का नाम नहीं है. इसमें कथित तौर पर गाड़ी चाल रहे एक नाबालिग लड़के के माता-पिता को भी शामिल किया गया है. चार्जशीट में 17 वर्षीय नाबालिग लड़के के नाम को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के पास लंबित है. आरोपपत्र में सात लोगों को आरोपी बनाया गया है.
किशोर के खून में अल्कोहल होने के टेस्ट में हेरफेर करने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत देने का आरोप है. सात आरोपियों पर आपराधिक षड्यंत्र और सबूत मिटाने से संबंधित धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया है. आरोपों में शवगृह और फोरेंसिक कर्मचारियों से जुड़ी एक साजिश का भी संकेत मिलता है. सीसीटीवी फुटेज के साथ 50 गवाहों के बयान को भी चार्जशीट में शामिल किया गया है. हालांकि जांच जारी है, इस प्रारंभिक आरोपपत्र में व्यापक विवरण शामिल हैं और पूरे रिपोर्ट के लिए आगे के डेटा की प्रतीक्षा है.
शुक्रवार को पुलिस ने 19 मई को हुए पोर्श दुर्घटना मामले में सात लोगों के खिलाफ अदालत में अपना पहला आरोपपत्र दाखिल किया. किशोरी के पिता (शहर के एक बिल्डर), मां, दो डॉक्टर अजय टावरे और श्रीहरि हलनोर, सासून जनरल अस्पताल के शवगृह कर्मचारी अतुल घाटकांबले (तीनों अब निलंबित हैं) और दो बिचौलिए - अशफाक मनकंदर और अमर गायकवाड़ का आरोपी बनाया गया है.
टावरे उस समय फोरेंसिक विज्ञान विभाग के प्रमुख थे और हलनोर अस्पताल में कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर थे. पुलिस का कहना है कि हलनोर ने किशोरी के रक्त के नमूने को नष्ट करने के लिए टावरे के निर्देश पर काम किया और इसे नाबालिग की मां के रक्त के नमूने से बदल दिया गया.
पुलिस के अनुसार, 19 मई को हुई दुर्घटना में नाबालिग, मुंधवा में कुछ पबों में दोस्तों के साथ पार्टी करने के बाद वडगांव शेरी में अपने घर लौटते समय कार चला रहा था. पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा कि मैं व्यक्तिगत भूमिकाओं से संबंधित साक्ष्यों के बारे में अभी ज्यादा टिप्पणी नहीं करूंगा. हमारे लिए सभी सात आरोपी मामले में सबूतों को नष्ट करने की साजिश का हिस्सा हैं और उन्होंने किशोर के रक्त शराब परीक्षण में हेरफेर करने के लिए रिश्वत का इस्तेमाल किया.
मामले में सरकारी वकील नियुक्त किए गए वकील शिशिर हिरय ने कहा, प्रारंभिक आरोपपत्र एक व्यापक दस्तावेज है जिसमें अब तक एकत्र किए गए सभी साक्ष्य शामिल हैं और इस मामले में एक मजबूत मामला बनाया गया है.
पुलिस ने आरोपपत्र में भारतीय दंड संहिता की धारा 304, 279, 337, 338, 427, 120(बी), 201, 213, 214, 466, 467, 468, 471, 109 और 34, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7(ए), 8, 13 और 12 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184, 185, 119 और 177 का उल्लेख किया है.
बता दें कि 19 मई को नाबालिग लड़का कथित तौर पर नशे में था और अपनी तेज रफ्तार पोर्शे कार से दो सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा को टक्कर मार दिया. दोनों की मौत हो गई. नाबालिग लड़के को किशोर न्याय बोर्ड ने जमानात दे दिया और माता-पिता के देखरेख में रहने का आदेश दिया. कोर्ट ने शर्त रखी थी कि लड़के को सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखाना होगा.