नई दिल्ली: पुणे के अस्पताल में बम रखने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा कर दिया है. आरोपी से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि उसने अस्पताल के इलाज के बदले भारी-भरकम बिल से नाराज होकर अस्पताल में बम रखा था. इस खुलासे के बाद पुलिस और देश की सुरक्षा एजेंसियों ने भी राहत की सांस ली है, अन्यथा इससे पहले इस पुरे घटनाक्रम को विदेशी साजिश और आतंकी एंगल से जोड़कर देखा जा रहा था.
गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए आरोपी शिवाजी राठौड़ को चलती ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया था. अस्पताल में बम रखने के बाद वो फरार होने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे दबोच लिया. गिरफ़्तारी के बाद पुलिस उससे विदेशी साजिश और आतंकी घटना के एंगल से पूछताछ कर रही थी.
पुणे पुलिस ने इस मामले में खुलासा करते हुए कहा कि आरोपी शिवाजी राठौड़ 10 मई को एक सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) के इलाज के लिए उषा किरण अस्पताल आया था. इलाज के दौरान उसे अस्पताल प्रबंधन ने 7 लाख रुपये का बिल थमाया, जिससे वो नाराज था. राठौड़ का मानना था कि अस्पताल प्रशासन उसका आर्थिक शोषण कर रहा है, जिसे लेकर उसने बदला लेने की साजिश रची थी.
पुलिस को आरोपी का सुराग एक UPI ट्रांजेक्शन के जरिये लगा, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी को धर दबोचा. पुलिस का कहना है कि आरोपी ने जो बम अस्पताल में रखे थे, वो असली बम नहीं थे और आरोपी का मकसद बस डर फैलाना था. मामला सामने आने के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड में आ गई थी और जांच शुरिउ कर दी थी, लेकिन इस पुरे घटनाक्रम में आतंकी एंगल की पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि पुलिस अभी भी आवश्यक जांच कार्रवाई में जुटी हुई है.
आपको बता दें कि पुणे के उषा किरण हॉस्पिटल के पहले मंजिल पर बुधवार शाम को पुरुषों के शौचालय में सफाई के दौरान एक संदिग्ध वस्तु मिली. सफाईकर्मी महिला ने इसकी सूचना अस्पताल प्रबंधन को दी. सूचना पर डॉ. विलास गायकवाड़ खुद उस वस्तु को एक बॉक्स में रखकर हॉस्पिटल के बाहर खाली जगह पर ले गए, क्योंकि तब ये माना जा रहा था कि ये किसी की शरारत है.
मामले में जैसे ही पुलिस के बम निरोधक दस्ते की एंट्री हुई, जांच में स्पष्ट हो गया कि संदिग्ध वस्तु बम ही है. बम निरोधक दस्ते ने एक खाली जगह पर बम को निष्क्रिय करने की कोशिश शुरू कर दी, लेकिन इस दौरान विस्फोट हो गया. विस्फोट की तीव्रता कम थी, लिहाजा कोई नुकसान नहीं हुआ. माना जा रहा है कि अगर ये विस्फोट अस्पताल के अंदर हुआ होता तो जान-माल का व्यापक नुकसान होता.