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प्रज्वल रेवन्ना स्कैंडल केस; कर्नाटक के गृह मंत्री ने PMO पर लगाया बड़ा आरोप, पूछा- और उन्हें क्या चाहिए?

Prajwal Revanna Scandal Case: कर्नाटक के हासन लोकसभा सीट से NDA के उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना के पासपोर्ट के रद्द करने की मांग को लेकर सिद्धारमैया सरकार ने पीएमओ पर निशाना साधा है.

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प्रज्वल रेवन्ना स्कैंडल केस; कर्नाटक के गृह मंत्री ने PMO पर लगाया बड़ा आरोप, पूछा- और उन्हें क्या चाहिए?
Courtesy: Photo Credit- Social Media

Prajwal Revanna Scandal Case: कर्नाटक के गृह मंत्री ने जी परमेश्वर ने हसन के सांसद प्रज्वल रेवन्ना के राजनयिक पासपोर्ट को जब्त करने में देरी के लिए पीएमओ पर निशाना साधा है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 1 और 23 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी. चिट्ठी में सिद्धारमैया ने पीएम मोदी से प्रज्वल के राजनयिक पासपोर्ट को रद्द करने के लिए कार्रवाई करने का आग्रह किया था. प्रज्वल पर कई महिलाओं के यौन शोषण का आरोप लगने के बाद देश से भाग जाने का आरोप है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर की ओर से ये खुलासा किए जाने के एक दिन बाद कि उनके मंत्रालय को हसन के सांसद प्रज्वल रेवन्ना का पासपोर्ट जब्त करने के लिए 21 मई को ही अनुरोध प्राप्त हुआ था, राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने शनिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने संबंधित मंत्रालय को तुरंत सूचित नहीं किया.

परमेश्वर ने कहा- देख सकते हैं कि केंद्र कैसे काम कर रहा है

परमेश्वर ने कहा कि इससे पता चलता है कि पीएमओ ने विदेश मंत्रालय कार्यालय को सूचित नहीं किया है. हम यह भी देख सकते हैं कि केंद्र कैसे काम कर रहा है. गृह मंत्री ने कहा कि एक बार राजनयिक पासपोर्ट रद्द हो जाने के बाद, प्रज्वल को भारत लौटना होगा क्योंकि वह विदेश में रहने की छूट खो देगा. 

इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने यात्रा दस्तावेज रद्द करने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए राजनीतिक नेताओं की आलोचना की. उनका दावा है कि उन्हें कानून की जानकारी नहीं है. कुमारस्वामी ने कहा कि सभी नेता राजनयिक पासपोर्ट के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कानून की कोई जानकारी नहीं है क्योंकि राजनयिक पासपोर्ट को तुरंत रद्द नहीं किया जा सकता है.

हालांकि, सिद्धारमैया ने कहा कि विदेश मंत्रालय के पास राजनयिक पासपोर्ट रद्द करने का अधिकार है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें मंत्रालय को लिखे 15 दिन हो चुके हैं. एसआईटी (विशेष जांच दल) ने भी एक पत्र लिखा है. उन्हें और क्या चाहिए?