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Ajit Doval Walkout: जब पाकिस्तान ने की थी नापाक हरकत, गुस्साए NSA अजीत डोभाल ने SCO बैठक से किया था वॉकआउट

सितंबर 2020 में SCO की वर्चुअल बैठक के दौरान पाकिस्तान ने विवादित नक्शा दिखाया, जिसमें जम्मू-कश्मीर और जूनागढ़ को अपना हिस्सा बताया. इसके विरोध में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बैठक से वॉकआउट कर सख्त संदेश दिया. रूस ने भी पाकिस्तान का समर्थन नहीं किया. अजीत डोभाल का करियर जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं से भरा है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
Ajit Doval Walkout: जब पाकिस्तान ने की थी नापाक हरकत, गुस्साए NSA अजीत डोभाल ने SCO बैठक से किया था वॉकआउट
Courtesy: Social Media

Ajit Doval Walkout: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने चीन पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई. इस दौरे ने पांच साल पुरानी उस घटना की याद दिला दी, जब भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने पाकिस्तान की उकसाऊ हरकत के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए SCO की बैठक से वॉकआउट कर दिया था.

यह घटना सितंबर 2020 की है, जब कोविड-19 महामारी के चलते SCO की बैठक वर्चुअल माध्यम से हो रही थी. पाकिस्तान के प्रतिनिधि डॉ. मुईद यूसुफ ने इस बैठक में नया राजनीतिक नक्शा दिखाया, जिसमें जम्मू-कश्मीर और जूनागढ़ को पाकिस्तान का हिस्सा बताया गया था. SCO चार्टर के अनुसार किसी भी सदस्य देश को द्विपक्षीय विवाद को बहुपक्षीय मंच पर उठाने की अनुमति नहीं है.

भारत ने तुरंत इसका किया विरोध

भारत ने तुरंत इसका विरोध किया. बैठक की अध्यक्षता कर रहे रूस ने भी पाकिस्तान को चेतावनी दी, लेकिन चेतावनी के बावजूद पाकिस्तान ने नक्शा नहीं हटाया. इसके बाद अजीत डोभाल ने बैठक से वॉकआउट कर भारत का कड़ा संदेश दिया कि उसकी क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.

डोभाल के फैसले की सराहना

रूस ने भी पाकिस्तान की इस हरकत का समर्थन नहीं किया और रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिव निकोलाई पेत्रुशेव ने डोभाल के फैसले की सराहना की. भारतीय अधिकारियों ने इसे SCO चार्टर का उल्लंघन और सदस्य देशों की संप्रभुता पर हमला बताया.

अजीत डोभाल: भारत के 'सुपर स्पाई'

अजीत डोभाल का करियर जासूसी उपन्यास जैसा रहा है. 1971 से 1978 तक वे पाकिस्तान में मुस्लिम मौलवी बनकर अंडरकवर एजेंट के रूप में तैनात रहे और भारत को अहम खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई. उन्होंने मिजो विद्रोहियों से शांति वार्ता कराई, जिसके बाद 1986 में मिजो शांति समझौता हुआ. 1988 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान उन्होंने स्वर्ण मंदिर में घुसकर खुफिया जानकारी जुटाई.

कंधार विमान अपहरण संकट में वार्ता दल का हिस्सा

1999 के कंधार विमान अपहरण संकट में वे वार्ता दल का हिस्सा रहे. 2014 में इराक में आईएसआईएस के कब्जे से 46 भारतीय नर्सों को सुरक्षित निकालने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई. 2016 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक की योजना में भी वे प्रमुख रणनीतिकार थे. अजीत डोभाल का SCO से वॉकआउट भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी सख्त प्रतिबद्धता का उदाहरण माना जाता है.