नई दिल्ली: साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 240 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जो पिछले चुनावों (2014 और 2019) के मुकाबले उतनी बड़ी जीत नहीं थी. साल 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले दम पर बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी, लेकिन 2024 में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों का सहारा लेना पड़ा.
इसे पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना गया था. 2014 और 2019 के मुकाबले कम सीटें आने के कारण यह भी कहा जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार को इस बार गठबंधन पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा और इसका असर फैसलों पर पड़ सकता है.
हालांकि, इन सभी आशंकाओं के विपरीत भाजपा और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने मजबूत प्रदर्शन किया है. लोकसभा चुनाव के बाद हुए कई राज्यों के चुनाव हुए, जिनमें हाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और दिल्ली जैसे राज्य शामिल है. इन सभी राज्यों में भाजपा ने जीत हासिल कर अपनी स्थिति और मजबूत की है.
इसका असर अब राज्यसभा में भी साफ दिखाई दे रहा है. पहली बार उच्च सदन में बीजेपी की संख्या 100 के पार पहुंच गई है. वहीं, एनडीए का कुल आंकड़ा भी 141 सीटों तक पहुंच गया है, जो 250 सदस्यीय राज्यसभा में एक मजबूत स्थिति मानी जा रही है.
हाल ही में खाली हुई 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए, जिनमें से एनडीए ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की. जिससे उसका कुल आंकड़ा 135 से बढ़कर 141 हो गया. ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में भाजपा ने अतिरिक्त सीटें जीतकर अपनी ताकत और बढ़ाई है. भाजपा के पास फिलहाल 101 निर्वाचित सदस्य हैं और 5 मनोनीत सदस्यों का समर्थन भी उसे प्राप्त है, जिससे उसकी कुल संख्या 106 तक पहुंच जाती है.
एनडीए के अन्य सहयोगी दलों की बात करें तो एआईएडीएमके और जेडीयू के 5-5 सदस्य हैं. महाराष्ट्र में सहयोगी एनसीपी के 4 सांसद हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 2 सदस्य हैं. आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ टीडीपी के पास भी 2 सदस्य हैं.
राज्यसभा में बढ़ती इस ताकत के चलते अब एनडीए के लिए विधेयकों को पारित कराना पहले के मुकाबले आसान हो गया है. भले ही लोकसभा में सीटें पहले से कम हो, लेकिन उच्च सदन में बढ़त ने गठबंधन को मजबूती दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति का असर 2029 के चुनावों तक देखने को मिल सकता है.
वहीं, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर नजर आ रही है. कांग्रेस के पास राज्यसभा में 29 सीटें हैं, जो भाजपा के मुकाबले काफी कम हैं. विपक्ष की कुल संख्या 62 के आसपास है. अन्य विपक्षी दलों को भी नुकसान उठाना पड़ा है. डीएमके की सीटें घटकर 8 रह गई हैं, जबकि पहले यह संख्या 10 थी. इसी तरह आरजेडी के सांसदों की संख्या भी घटकर 3 हो गई है, जो पहले 5 थी.