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India Daily

मिडिल ईस्ट संकट पर पीएम मोदी की बड़ी कूटनीतिक पहल, ओमान-कुवैत के नेताओं से की सीधी बात, जानें किस पर रहा फोकस?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान और कुवैत के नेताओं से बातचीत की. उन्होंने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता जताई और संयम व कूटनीति की अपील दोहराई.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
मिडिल ईस्ट संकट पर पीएम मोदी की बड़ी कूटनीतिक पहल, ओमान-कुवैत के नेताओं से की सीधी बात, जानें किस पर रहा फोकस?
Courtesy: ani

पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच भारत ने कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान और कुवैत के शीर्ष नेतृत्व से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चर्चा की. हाल के हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है. ऐसे समय में भारत ने स्पष्ट किया है कि संवाद और संयम ही तनाव कम करने का रास्ता है.

ओमान और कुवैत से सीधी बातचीत

प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद से फोन पर बात की. दोनों वार्ताओं में उन्होंने हालिया हमलों पर चिंता व्यक्त की और क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की. प्रधानमंत्री ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है.

भारतीय समुदाय की सुरक्षा प्राथमिकता

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने ओमान और कुवैत में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कुशलक्षेम का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. उन्होंने दोहराया कि विदेशों में बसे भारतीयों की रक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. हालात बिगड़ने की आशंका के बीच दूतावासों को सतर्क रहने और नागरिकों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं.

भारत की कूटनीतिक पहल

यह पहल उस समय हुई है जब प्रधानमंत्री ने एक दिन पहले सऊदी अरब, बहरीन और जॉर्डन के नेताओं से भी संवाद किया था. विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र की ताजा घटनाओं से गहराई से चिंतित है. सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है.

क्षेत्रीय संकट और वैश्विक असर

28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है. बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों से हालात और गंभीर हो गए हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी प्रभावित होने से तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है. कई खाड़ी देशों ने अपने क्षेत्रों पर हुए हमलों की निंदा की है. इस संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता भी बढ़ा दी है.