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किसान की बेटी से पैरा चैंपियन तक, हरियाणा के ये 4 खिलाड़ी होंगे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित

हरियाणा की खेल प्रतिभा ने एक बार फिर देशभर में अपनी पहचान मजबूत की है. वर्ष 2025 के अर्जुन पुरस्कारों की सूची में प्रदेश के चार खिलाड़ियों को जगह मिली है.

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Edited By: Reepu Kumari
किसान की बेटी से पैरा चैंपियन तक, हरियाणा के ये 4 खिलाड़ी होंगे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित
Courtesy: @NayabSainiBJP

चंडीगढ़: हरियाणा को खेलों की धरती कहा जाता है और यहां के खिलाड़ियों ने कई मौकों पर देश का गौरव बढ़ाया है. अब प्रदेश के चार और खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों से यह पहचान और मजबूत की है. वर्ष 2025 के अर्जुन पुरस्कारों की सूची में हरियाणा के नरेंद्र बेरवाल, एकता भ्यान, सुरजीत नरवाल और पूजा हथवाला का नाम शामिल किया गया है. चारों खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में अपने प्रदर्शन से खास मुकाम हासिल किया है.

इस बार केंद्र सरकार ने कुल 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना है. पुरस्कारों के लिए 24 नामों की सिफारिश की गई थी. चयन समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अरुण कुमार मिश्रा ने की थी. हरियाणा के इन चार खिलाड़ियों का चयन प्रदेश में खेलों के प्रति बढ़ते रुझान और प्रतिभाओं की मजबूत मौजूदगी को भी दर्शाता है. इनकी कहानियां संघर्ष, मेहनत और लगातार बेहतर करने की कोशिश से जुड़ी हैं.

नरेंद्र बेरवाल ने मुक्केबाजी में बनाई पहचान

हांसी के गांव सोरखी के रहने वाले सूबेदार नरेंद्र बेरवाल ने मुक्केबाजी में अपनी अलग पहचान बनाई है. अर्जुन पुरस्कार के लिए चयन की खबर मिलने के बाद उन्होंने इसे अपनी वर्षों की मेहनत का परिणाम बताया. नरेंद्र के लिए यह सम्मान सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि आगे और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा भी है.

नरेंद्र ने कहा कि मेहनत का परिणाम सामने आया है और इससे उनका हौसला बढ़ा है. अब उनकी नजर अगले बड़े लक्ष्य पर है. वह एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक जीतना चाहते हैं. अर्जुन पुरस्कार उनके खेल सफर में एक अहम उपलब्धि के रूप में जुड़ने जा रहा है.

चार साल के इंतजार के बाद एकता को सम्मान

हिसार के सेक्टर 1-4 की रहने वाली पैरा एथलीट एकता भयान को अर्जुन पुरस्कार के लिए चयन होने का लंबे समय से इंतजार था. उन्हें इस सम्मान के लिए करीब चार साल तक प्रतीक्षा करनी पड़ी. अब उनका नाम पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल होने से उनके परिवार और खेल जगत में खुशी का माहौल है.

एकता ने चयन पर खुशी जाहिर की है. हालांकि, सम्मान मिलने की खुशी के बीच उनका ध्यान अगले लक्ष्य पर है. वह अक्टूबर में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी में जुटी हैं. उनके लिए अर्जुन पुरस्कार बीते वर्षों की मेहनत का सम्मान होने के साथ आगे की चुनौतियों के लिए नई ऊर्जा भी है.

सुरजीत नरवाल रहे कबड्डी की मजबूत दीवार

सोनीपत के गांव कथूरा के रहने वाले सुरजीत नरवाल भारतीय कबड्डी टीम के प्रमुख डिफेंडरों में शामिल रहे हैं. मैदान पर उनकी मजबूत रक्षा क्षमता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई. सुरजीत भारतीय टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

एशियाई खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में भी सुरजीत का योगदान अहम रहा. कबड्डी जैसे तेज और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण खेल में डिफेंडर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. सुरजीत ने लगातार अपने प्रदर्शन के जरिए इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और अब अर्जुन पुरस्कार उनके खेल करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल होने जा रहा है.

किसान की बेटी पूजा हथवाला ने रचा इतिहास

जींद जिले के गांव हथवाला की पूजा हथवाला ने महिला कबड्डी में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. वह 2022 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा थीं. टीम में प्रमुख रेडर के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही और एशियन गेम्स में उनका प्रदर्शन शानदार रहा.

पूजा के पिता किसान हैं और उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच खेल की दुनिया में अपना मुकाम बनाया. बीते वर्ष एशियाई महिला कबड्डी चैंपियनशिप और महिला कबड्डी वर्ल्ड कप में भारत को विजेता बनाने में भी पूजा की अहम भूमिका रही. अर्जुन पुरस्कार उनके संघर्ष और उपलब्धियों को मिलने वाली बड़ी पहचान है.

चार नाम, एक ही संदेश

नरेंद्र बेरवाल, एकता भ्यान, सुरजीत नरवाल और पूजा हथवाला की उपलब्धियां हरियाणा की खेल संस्कृति की तस्वीर पेश करती हैं. किसी ने मुक्केबाजी में पहचान बनाई तो किसी ने पैरा खेलों में देश का नाम रोशन किया. वहीं सुरजीत और पूजा ने कबड्डी के मैदान पर भारत को गौरवान्वित किया. इन चारों का अर्जुन पुरस्कार सूची में शामिल होना प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है.

इन खिलाड़ियों की कहानी यह भी बताती है कि सफलता केवल सुविधाओं से तय नहीं होती. लगातार मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण से खिलाड़ी मुश्किल परिस्थितियों को पीछे छोड़कर ऊंचाई हासिल कर सकते हैं. अब अर्जुन पुरस्कार मिलने के बाद चारों खिलाड़ियों की नजर आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और देश के लिए नई उपलब्धियां हासिल करने पर है.