नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा की चुनावी बिसात पर अपने मोहरों का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने छह महत्वपूर्ण राज्यों के लिए कुल 9 प्रत्याशियों के नाम तय किए हैं. 16 मार्च को होने वाले मतदान के लिए अधिसूचना जारी हो चुकी है और नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है. इस चयन में बीजेपी ने स्पष्ट रूप से उन नेताओं को प्राथमिकता दी है, जिनका संगठन में गहरा अनुभव और मजबूत पकड़ रही है.
बिहार की पांच सीटों के लिए पार्टी ने नितिन नवीन को अपना उम्मीदवार बनाया है. वे पटना के बांकीपुर से पांच बार विधायक रहे हैं और बिहार की राजनीति में उनकी मजबूत पहचान है. उनके साथ ही युवा नेता शिवेश कुमार को भी राज्यसभा का टिकट दिया गया है. पार्टी ने यहां अनुभव और युवा जोश का संतुलन बनाने की कोशिश की है. नितिन नवीन की उम्मीदवारी से स्पष्ट है कि बीजेपी अपनी सांगठनिक पकड़ को पुख्ता करना चाहती है.
असम में तीन रिक्त सीटों के लिए बीजेपी ने तेराश गोवाला और जोगेन मोहन को मैदान में उतारा है. ये दोनों नेता राज्य की राजनीति में काफी समय से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. वहीं ओडिशा से मनमोहन समल और सुजीत कुमार को टिकट दिया गया है. ओडिशा में बीजेपी की सरकार होने के कारण यहां पार्टी की स्थिति बेहद अनुकूल मानी जा रही है. इन चयनों के माध्यम से पार्टी ने क्षेत्रीय नेतृत्व को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है.
पश्चिम बंगाल से बीजेपी ने अपने प्रमुख चेहरे राहुल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है. राहुल सिन्हा राज्य में पार्टी के सबसे प्रमुख और अनुभवी नेताओं में से एक गिने जाते हैं. उन्हें राज्यसभा भेजना बंगाल इकाई के कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा संदेश है. पार्टी बंगाल में अपनी उपस्थिति को और प्रभावी बनाने के लिए अनुभवी नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर लाना चाहती है. उनकी उम्मीदवारी की घोषणा से राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है.
छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा को प्रत्याशी घोषित किया गया है. वे बीजेपी महिला मोर्चा में लंबे समय से सक्रिय रही हैं और अपने सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती हैं. दूसरी ओर, हरियाणा से संजय भाटिया को मौका दिया गया है. संजय भाटिया प्रशासनिक पृष्ठभूमि से आते हैं और पार्टी संगठन में उनकी भूमिका काफी अहम रही है. दोनों राज्यों में खाली हो रही दो-दो सीटों के लिए पार्टी ने अपने सबसे भरोसेमंद चेहरों पर दांव लगाया है.
देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए हो रहा यह चुनाव राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है. बीजेपी की यह सूची दर्शाती है कि पार्टी आगामी चुनौतियों के लिए अपने सांगठनिक ढांचे को संसद के उच्च सदन में और मजबूत करना चाहती है. संगठन पर पकड़ रखने वाले नेताओं को तरजीह देना इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. 16 मार्च को होने वाला मतदान संसद के उच्च सदन की भविष्य की तस्वीर साफ करेगा.