नई दिल्ली: देश की सत्ता के केंद्र में 77 साल बाद एक ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मकर संक्रांति के अवसर पर मरुधरा के पावन पर्व के साथ अपने नए कार्यालय से कामकाज संभालने जा रहे हैं. दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित नया एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव आधुनिक भारत की सुरक्षा, तकनीक और प्रशासनिक क्षमता का प्रतीक माना जा रहा है. यह नया पीएमओ साउथ ब्लॉक के पुराने कार्यालय से कहीं अधिक सुरक्षित, विशाल और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है.
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बने इस नए पीएमओ का कुल क्षेत्रफल 2,26,203 वर्ग फुट है. करीब 1,189 करोड़ रुपये की लागत से बने एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में अभेद्य सुरक्षा और अंडरग्राउंड सुरंग जैसी सुविधाएं हैं. यह परिसर दुनिया की सबसे सुरक्षित सरकारी इमारतों में गिना जा रहा है. यहां प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ कैबिनेट रूम और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय का भी कार्यालय होगा. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय को और मजबूत किया जाएगा.
नए पीएमओ की सबसे बड़ी खासियत इसकी अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था है. पूरे परिसर को मल्टी लेयर सिक्योरिटी सिस्टम से सुरक्षित किया गया है. इसमें बुलेटप्रूफ संरचनाएं, हाई सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस रूम और अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली शामिल है. सुरक्षा के लिहाज से इस इमारत को इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके.
इस परिसर में प्रधानमंत्री के आवास और कार्यालय को जोड़ने वाली एक गुप्त अंडरग्राउंड सुरंग भी बनाई गई है. इस सुरंग के जरिए प्रधानमंत्री बिना सार्वजनिक आवाजाही को प्रभावित किए अपने कार्यालय तक पहुंच सकेंगे. इससे वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान दिल्ली की सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
नया एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव केवल एक कार्यालय नहीं बल्कि विकसित भारत 2047 की सोच को दर्शाता है. सरकार का मानना है कि यह परिसर प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ साथ आधुनिक शासन प्रणाली का उदाहरण बनेगा. प्रधानमंत्री मोदी का इस नए दफ्तर से काम शुरू करना भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है.