menu-icon
India Daily

होर्मुज स्ट्रेट बंद, ऊर्जा संकट को लेकर पीएम मोदी की हाई लेवल मीटिंग आज

ईरान युद्ध के बीच ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है. सरकार का लक्ष्य देश में पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
होर्मुज स्ट्रेट बंद, ऊर्जा संकट को लेकर पीएम मोदी की हाई लेवल मीटिंग आज
Courtesy: pinterest

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार शाम वरिष्ठ मंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक करने जा रहे हैं. इस बैठक में पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी. अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते सप्लाई चेन पर पड़ रहे असर को देखते हुए सरकार लगातार निगरानी कर रही है और संभावित संकट से निपटने की रणनीति तैयार कर रही है.

ऊर्जा आपूर्ति पर सरकार की नजर

सरकार का मुख्य फोकस देश में ऊर्जा संसाधनों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है. पेट्रोलियम उत्पादों, बिजली उत्पादन और उर्वरक आपूर्ति में किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए विभागों के बीच तालमेल बढ़ाया जा रहा है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संभावित बाधा से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखें और वितरण व्यवस्था सुचारु बनाए रखें.

पश्चिम एशिया संकट का असर

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है. ईरान की जवाबी कार्रवाई ने हालात को और जटिल बना दिया है. इस तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है, जिससे कई देशों में आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है. भारत भी इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण

ईरान के नियंत्रण में स्थित हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है, जहां से करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा का परिवहन होता है. मौजूदा हालात में यहां जहाजों की आवाजाही सीमित हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति प्रभावित हो रही है. इसका असर भारत समेत कई देशों की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है.

वैश्विक संवाद और रणनीति

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं से बातचीत की है. सरकार का कहना है कि बदलते हालात के बीच उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों की रक्षा प्राथमिकता है. साथ ही, आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं को दूर करने के लिए वैकल्पिक उपायों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है.