पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन से वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध पर बात की. पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने बढ़ती दुश्मनी और आम लोगों की जान जाने पर गहरी चिंता जताई. प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, साथ ही सामान और एनर्जी के बिना रुकावट आने-जाने की जरूरत, भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है.
पीएम मोदी ने X पर कहा, “ईरान के प्रेसिडेंट डॉ. मसूद पेजेशकियन से इलाके के गंभीर हालात पर बात हुई. बढ़ते टेंशन और आम लोगों की जान जाने के साथ-साथ सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई.” उन्होंने आगे कहा, “भारतीय नागरिकों की सेफ्टी और सिक्योरिटी, साथ ही सामान और एनर्जी के बिना रुकावट आने-जाने की जरूरत, भारत की टॉप प्रायोरिटी बनी हुई है. शांति और स्टेबिलिटी के लिए भारत का कमिटमेंट दोहराया और बातचीत और डिप्लोमेसी की अपील की.”
Had a conversation with Iranian President, Dr. Masoud Pezeshkian, to discuss the serious situation in the region.
Expressed deep concern over the escalation of tensions and the loss of civilian lives as well as damage to civilian infrastructure.
The safety and security of…— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2026Also Read
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद यह भारत और ईरान के नेताओं के बीच पहली सीधी बातचीत है. भारतीय लीडरशिप ने ईरान पर US-इजराइली हमलों और खाड़ी पर तेहरान के जवाबी हमलों के बाद, पश्चिम एशिया में टेंशन को हल करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी के महत्व पर बार-बार जोर दिया है, जहां भारतीय डायस्पोरा का एक बड़ा हिस्सा रहता है. पीएम मोदी की पेजेशकियन के साथ बातचीत तब हुई जब भारत ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में एक प्रस्ताव को-स्पॉन्सर किया, जिसमें खाड़ी देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की निंदा की गई थी.
प्रस्ताव में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के देशों और जॉर्डन पर ईरान के बहुत बुरे हमलों की निंदा की गई. इसमें तेहरान के सभी हमलों को तुरंत रोकने की भी मांग की गई और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकियों की भी निंदा की गई, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई रुक गई है और तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं. मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि भारतीय झंडे वाले टैंकर पुष्पक और परिमल स्ट्रेट से सुरक्षित रूप से गुजरने में कामयाब रहे, जबकि अमेरिका, यूरोप और इज़राइल से जुड़े जहाजों पर चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष के बीच पाबंदियां लगी हुई हैं.