menu-icon
India Daily

सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे, पीएम मोदी ने किया कुंभाभिषेक, जारी किए स्मारक टिकट और सिक्का

प्रधानमंत्री मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा- 'प्रभास पाटन का यह पवित्र क्षेत्र एक अद्भुत प्रभा से भरा हुआ है. महादेव का सौंदर्य, भगवा ध्वजों की आभा, कला, संगीत, नृत्य और वेद मंत्रों का मिला-जुला स्वरूप ऐसा लग रहा है जैसे पूरी सृष्टि एक साथ बोल रही हो- जय सोमनाथ, जय-जय सोमनाथ.'

antima
Edited By: Antima Pal
सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे, पीएम मोदी ने किया कुंभाभिषेक, जारी किए स्मारक टिकट और सिक्का
Courtesy: x

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को 75 साल पूरे होने पर आज 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' धूमधाम से मनाया गया. इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहली बार मंदिर पहुंचे और 75 वर्षों में पहली बार शिखर का कुंभाभिषेक किया. 

समारोह के दौरान पीएम मोदी ने अमृत महोत्सव के तहत विशेष स्मारक डाक टिकट और 75 रुपये का स्मारक सिक्का भी जारी किया. इससे पहले प्रधानमंत्री ने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की. गर्भगृह में शिवपंचाक्षरी मंत्र का अखंड पाठ चल रहा था. पूरे मंदिर परिसर में भगवा ध्वज लहरा रहे थे, पुष्प वर्षा हो रही थी और वेद मंत्रों का उच्चारण गूंज रहा था. सागर की लहरों की आवाज के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था.

प्रधानमंत्री मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा- 'प्रभास पाटन का यह पवित्र क्षेत्र एक अद्भुत प्रभा से भरा हुआ है. महादेव का सौंदर्य, भगवा ध्वजों की आभा, कला, संगीत, नृत्य और वेद मंत्रों का मिला-जुला स्वरूप ऐसा लग रहा है जैसे पूरी सृष्टि एक साथ बोल रही हो- जय सोमनाथ, जय-जय सोमनाथ.'

उन्होंने आगे कहा कि समय स्वयं जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो कालातीत और कालस्वरूप हैं, आज उन्हीं देवाधिदेव महादेव की प्रतिष्ठा के 75 वर्ष हम मना रहे हैं. पीएम मोदी ने याद दिलाया कि जो हलाहल विष पीकर नीलकंठ बने, आज उन्हीं की शरण में सोमनाथ अमृत महोत्सव मना रहा है. यह उनकी लीला है. सोमनाथ मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन और गौरवशाली है. इसे कई बार तोड़ने की कोशिशें हुईं, लेकिन हर बार यह फिर से खड़ा हुआ. स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में इसका आधुनिक पुनर्निर्माण हुआ. 11 मई 1951 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रतिष्ठा की गई थी. 

आज 75 साल बाद प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में यह नया अध्याय जुड़ गया है. इस अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. नृत्य, संगीत और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. स्मारक डाक टिकट और 75 रुपये के सिक्के के जारी होने से इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है. यह सिक्का और टिकट सोमनाथ के गौरव को देश और दुनिया में फैलाएगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, त्याग और पुनरुत्थान का प्रतीक है. यह उत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी है. देश के इस पवित्र पर्व पर लाखों भक्तों ने 'जय सोमनाथ' के नारे लगाए. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत की आस्था अटूट है और उसकी सांस्कृतिक विरासत सदैव जिंदा रहेगी.