नई दिल्ली: संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम करार दिया है. उन्होंने कहा कि माताओं और बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और इसी भावना के साथ सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है. आज लोकसभा में महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा होगी. सरकार का लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करना है. विपक्ष इस विधेयक के परिसीमन प्रावधानों का विरोध कर रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज से संसद का विशेष सत्र शुरू हो रहा है और देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है. उन्होंने संस्कृत श्लोक का हवाला देते हुए लिखा कि माताओं और बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है. पीएम आज लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर विस्तृत रूप से बोलेंगे और इसके क्रियान्वयन का रोडमैप पेश करेंगे. सरकार का प्रयास है कि 2023 में पास हुए कानून को अब जल्द से जल्द लागू किया जाए.
सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है. इस दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और संघ राज्य क्षेत्र कानून संशोधन विधेयक पेश किए जाएंगे. इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को 2029 के चुनाव से पहले लागू करना है. सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर नए परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों को बढ़ाने और आरक्षण लागू करने का रास्ता तैयार कर रही है.
विपक्षी दलों ने परिसीमन प्रावधानों का तीखा विरोध किया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी दलों की बैठक हुई. राहुल गांधी, टीआर बालू, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, संजय राउत और अन्य नेता इसमें शामिल हुए. विपक्ष का कहना है कि परिसीमन दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक भागीदारी को कमजोर करेगा. उन्होंने महिला आरक्षण का सिद्धांततः समर्थन किया लेकिन परिसीमन विधेयक का विरोध करने का फैसला लिया है.
यह विशेष सत्र भारतीय राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अगर विधेयक पास हो गए तो 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो जाएगा और लोकसभा सीटों की संख्या भी बढ़ जाएगी. इससे उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है. सत्र में तीखी बहस की उम्मीद है. प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन और विपक्ष की रणनीति दोनों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.