नई दिल्ली: संसद सुरक्षा चूक मामले को लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने केंद्र सरकार ने बड़ा हमला बोला है. रणदीप सुरजेवाला ने लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों सहित 78 सांसदों को निलंबित को लेकर सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया है. सुरजेवाला ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र, भारत के संविधान और देश की गंगा-जमुनी संस्कृति पर हमला है.
सुरजेवाला ने बड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए "देश के इतिहास में पचहत्तर साल में जो नहीं हुआ वो अब हुआ है, लोकसभा और राज्यसभा से 92 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है. हम लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह इस देश के लोकतंत्र पर सीधा-सीधा करारा हमला है. इस देश के संविधान पर हमला किया गया है. इस देश की गंगा-जमुनी संस्कृति पर हमला किया गया है. इसमें देश संविधान की परंपरा, संसदीय मर्यादा पर हमला किया गया हैं. अहंकार के बुलडोजर से लोकतंत्र को कुचला जा रहा है. बहुमत की आड़ में एक व्यक्ति और एक पार्टी द्वारा संविधान को रौंदा जा रहा है. लोकतांत्रिक परंपरा और संसदीय मर्यादा को तार-तार कर कहीं फेंक दिया जा रहा है. यह न देश न तो इस देश के लोगों के लिए सही है, न ही यह उस संविधान की गरिमा के अनुरूप है जिससे यह सरकार चुनी गई है. मोदी सरकार को न तो लोकतांत्रिक परंपराओं में विश्वास है और न ही भारत के संविधान में. मोदी सरकार अहंकार से भरी है. उन्होंने निश्चित रूप से तीन में जीत हासिल की है राज्य लेकिन यह मत भूलिए कि एक राज्य में कांग्रेस बनी है और दूसरे राज्य में गैर-भाजपा और गैर-कांग्रेसी सरकार भी बनी है. हम जनमत के सामने झुकते हैं लेकिन जनमत का मतलब तानाशाही नहीं हो सकता."
#WATCH | On suspension of 45 Opposition MPs, including him, from Rajya Sabha today, Congress MP Randeep Surjewala says, "In 75 years, perhaps this is the saddest day for Parliamentary democracy. What are the MPs and Opposition of the country saying? We are only demanding that the… pic.twitter.com/FPSkwpIwQi
— ANI (@ANI) December 18, 2023Also Read
बीते कल लोकसभा के 33 विपक्षी सांसद और राज्यसभा के 45 विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया. इस प्रकार इस सत्र में निलंबित सांसदों की कुल संख्या 92 हो गई है. सुरक्षा उल्लंघन पर बयान की मांग करने के लिए पिछले सप्ताह भी चौदह सांसदों को निलंबित कर दिया गया था. विपक्षी सांसदों को शेष शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित करने का कारण कदाचार और सभापति के निर्देशों का पालन करने में विफलता बताया गया.