केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक 2024 लोकसभा में गुरुवार को पेश किया. इस बिल पर संसद के दोनों सदनों में घमासान मचा है. इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दलों का कहना है कि यह बिल, अल्पसंख्यक विरोधी है और उनके उत्पीड़न के लिए लाया गया है. इस बिल पर कभी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सुर में सुर मिलने वाली राजनीतिक पार्टियां भी उतर आई हैं. शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और अकाली दल का रुख भी वक्फ बोर्ड संशोधन के खिलाफ है. नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रहीं हरसिमरत कौर बादल भी इस बिल के खिलाफ मुखर होकर विरोध कर रही हैं और यह कह रही हैं कि इस पार्टी का रुख ही अल्पसंख्यक विरोधी है.
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर हरसिमरत कौर बादल ने कहा, 'मैने तो बिल के पेश होने से पहले ही कह दिया था. ये सरकार अपनी ध्रुवीकरण की राजनीति से बाज नहीं आती है. ये अल्पसंख्यकों को अमन, शांति और चैन से जीने नहीं देना चाहते हैं. हर अल्पसंख्यक समुदायों का इनके प्रति रोष है. ये अल्पसंख्यकों पर हावी होना चाहते हैं. हम लोकतंत्र में रहते हैं, इसमें हर धर्म को मानने की आजादी है, ये अपने पड़ोसियों का हाल नहीं देख रहे हैं. क्या जरूरत है कि किसी अल्पसंख्यक धार्मिक संस्थाओं में दखल देना चाहते हैं.'
हरसिमरत कौर बादल ने कहा, ' इनकी सरकार में न कोई मुस्लिम सांसद है, मुस्लिम के प्रति इनका क्या रुख है, ये मुस्लिम महिलाओं की बड़ी चिंता जता रहे हैं. हम सिख कौम इन दोनों बड़ी पार्टियों का (कांग्रेस-बीजेपी) शिकार बन चुके हैं. हमारी चुनी गई निकाय एसजीपीसी का मिनि लोकतंत्र है. वह हमारे धार्मिक काम-काज देखती है लेकिन उसमें भी ये दखल देते हैं. कांग्रेस ने हरियाणा की एसजीपीसी हमारे तोड़ा, बीजेपी ने हमारे गुरुद्वारों में अपने पिट्ठू बिठाए. मैं इसकी निंदा करती हूं. ये अल्पसंख्यकों के धार्मिक संस्थाओं से छेड़छाड़ करते हैं.'
शिवसेना (उद्धव गुट) दशकों तक धुर हिंदुत्ववादी पार्टी रही है लेकिन अब रंग बदल गया है. शिवसेना अब सेक्युलर पार्टी बन चुकी है. शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी वक्फ बोर्ड (संशोधन) विधेयक 2024 पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा, 'हर सुधार के पीछे, बीजेपी ध्रुवीकरण का अपना एजेंडा लेकर आई है. यह पार्टी मुस्लिमों के खिलाफ काम करती है. पहले उन्होंने इसे धर्म के आधार पर किया और अब वे इसे जाति के आधार पर कर रहे हैं.'
शिवसेना (उद्धव गुट) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'यह बिल मुस्लिम विरोधी, धर्म विरोधी और संघीय ढांचे के खिलाफ है. यह एक संयुक्त समिति के पास गया है. अगर वे किसी के अधिकार को छीनना चाहते हैं, तो हम इसका कड़ा विरोध करेंगे. यह बिल दिखाता है कि वे महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के आगामी राज्य चुनावों में बिल से लाभ उठाने का इरादा रखते हैं. लेकिन, लोग अब उन्हें समझ चुके हैं. लोकसभा चुनावों में इसका नाजारा दिख चुका है.'
आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा, 'बिल को अब जेपीसी के पास भेज दिया गया है. हम जेपीसी के सामने भी अपनी बात रखेंगे. हर फैसले के साथ एक नीयत जुड़ी होती है, अगर नीयत अच्छी न हो तो फ़ैसला नुकसानदेह हो सकता है. हमें संदेह इसलिए होता है क्योंकि केंद्र सरकार और यूपी सरकार की कुछ नीतियां मुसलमानों के पक्ष में नहीं हैं. सरकार, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न करना चाहती है, हम इसके विरोध में आवाज उठाएंगे.'