New Income Tax Bill 2025: नए इनकम टेक्स बिल 2025, जो 1961 के जटिल और छह दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट को बदलने के लिए तैयार किया गया है, आज (21 जुलाई 2025) लोकसभा में चर्चा के लिए पेश होगा. इस बिल की समीक्षा के लिए गठित संसदीय प्रवर समिति की रिपोर्ट भी आज सदन में प्रस्तुत की जाएगी. यह बिल करदाताओं के लिए कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. आइए, इस बिल के प्रमुख पहलुओं और बदलावों पर नजर डालते हैं.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा नियुक्त 31 सदस्यीय प्रवर समिति, जिसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद बैजयंत पांडा कर रहे हैं, ने इस बिल की गहन जांच की. समिति ने 16 जुलाई 2025 को अपनी बैठक में 285 सुझावों के साथ इस बिल पर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया. ये सुझाव कर प्रणाली को और अधिक प्रभावी और करदाताओं के लिए सुगम बनाने पर केंद्रित हैं. यह रिपोर्ट आज संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में पेश की जाएगी, जो 21 जुलाई से 21 अगस्त 2025 तक चलेगा.
नया इनकम टैक्स बिल 2025, 1961 के इनकम टैक्स एक्ट की तुलना में आकार में लगभग आधा है. इसमें शब्दों की संख्या 5.12 लाख से घटाकर 2.6 लाख और धाराओं की संख्या 819 से 536 कर दी गई है. इसके अलावा, अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 और 1,200 प्रावधानों के साथ 900 स्पष्टीकरणों को हटा दिया गया है. इस सरलीकरण का उद्देश्य मुकदमेबाजी को कम करना और कर निश्चितता को बढ़ावा देना है.
इस बिल में एक बड़ा बदलाव 'पिछले ईयर' और 'कर निर्धारण ईयर' की अवधारणा को समाप्त करना है. अब आय पर उसी 'टैक्स ईयर' में कर लगाया जाएगा, जिसमें वह अर्जित की गई है. उदाहरण के लिए, वर्तमान में 2023-24 में अर्जित आय पर 2024-25 में कर लगता है, लेकिन नए बिल में यह प्रक्रिया सरल होकर केवल 'टैक्स ईयर' पर आधारित होगी. यह बदलाव करदाताओं को कर प्रक्रिया को समझने में आसानी प्रदान करेगा.
नए बिल में छूट और स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस)/स्रोत पर कर संग्रहण (टीसीएस) के प्रावधानों को सारणीबद्ध प्रारूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे उनकी व्याख्या आसान होगी. बिल में 57 तालिकाएं शामिल की गई हैं, जबकि मौजूदा अधिनियम में केवल 18 तालिकाएं थीं. इसके अलावा, गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) के लिए नियमों को सरल भाषा में फिर से लिखा गया है, जिससे अनुपालन आसान होगा.
नए बिल में डिजिटलीकरण और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है. ई-केवाईसी (e-KYC) और ऑनलाइन टैक्स भुगतान को अनिवार्य करने का प्रस्ताव है, जिससे कर प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी. इसके साथ ही, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों (VDA) को 'परिसंपत्ति' श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, ताकि इन पर कराधान को स्पष्ट किया जा सके.
नए बिल में स्टार्टअप्स, डिजिटल व्यवसायों और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं. पूंजीगत लाभ कर के नियमों को भी सरल बनाया गया है, और गैर-निवासियों की आय पर कर नियमों को अधिक स्पष्ट किया गया है. यह बिल करदाताओं, विशेष रूप से नए व्यवसायों और पेशेवरों के लिए लाभकारी होगा.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 13 फरवरी 2025 को इस बिल को पेश करते हुए कहा था, "इस बिल में काफी बदलाव किए गए हैं. यह कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और करदाताओं के लिए सुगम बनाएगा." उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इसे प्रवर समिति को भेजने का आग्रह किया था, जिसके बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की.