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India Daily
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यौन उत्पीड़न, मानहानि और वह लेख, आखिर क्या है महाराज जदुनाथ और करसनदास मुलजी के विवाद की कहानी?

Netflix Film Maharaj Controversy: गुजरात हाईकोर्ट ने अभिनेता जुनैद खान और जयदीप अहलावत की भूमिका वाली फिल्म महाराज पर रोक लगा दी है. वल्लभाचार्य और भगवान श्री कृष्ण को मानने वाले अनुयायियों ने अपनी याचिका में कहा था कि इस फिल्म के रिलीज होने पर सामाजिक व्यवस्था बिगड़ सकती है. अनुयायियों का कहना है कि यह फिल्म हिंदुओं के बीच हिंसा को भड़का सकती है. यह फिल्म साल 1862 के एक ऐतिहासिक मामले पर आधारित है.

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Shubhank Agnihotri
Maharaj
Courtesy: Social Media

Netflix Film Maharaj Controversy:  गुजरात हाई कोर्ट ने यशराज बैनर के तले बनी फिल्म महाराज जो नेटफ्लिक्स पर चोरी छिपे रिलीज होने वाली थी पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने इस फिल्म पर लोगों की धार्मिक भावनाएं ना भड़कें इसलिए रोक लगाई है. यह फिल्म साल 1862 के एक ऐतिहासिक मामले से संबंधित है जिसमें एक पत्रकार करसनदास मुलजी ने धार्मिक सत्ता को चुनौती देते हुए एक लेख लिखा था. इस लेख में धर्म की आड़ में हो रहे महिलाओं के शोषण और उन पर हो रहे अत्याचारों के बारे में लिखा गया था. यह केस लंबी बहस और विवाद के बाद भारतीय न्यायपालिका का ऐतिहासिक मामला बन गया. 

साल 1832 में बॉम्बे में जन्मे करसनदास मुलजी प्रगतिशील विचारों वाले व्यक्ति थे. वे उस दौरान समाज के अंदर फैली कुरीतियों को दूर करने का प्रयास कर रहे थे. पेश से पत्रकार मुलजी उस दौरान समाज में फैली कुरीतियों, असमानताओं, अशिक्षा, विधवा पुनर्विवाह , बाल विवाह, धार्मिक कर्मकांड जैसे मुद्दों पर खुलकर लिखा करते थे. वे राफ्त गोफ्तार अखबार में इन मुद्दों पर अक्सर लिखा करते थे, लेकिन उन्हें लगता था कि वे इससे कहीं ज्यादा अच्छा कर सकते हैं. उन्हें इसके लिए स्वतंत्रता की आवश्यकता थी ताकि वे बेरोक-टोक लिखना जारी रख सकें. इसी स्वतंत्रता की चाह में साल 1855 में उन्होंने सत्य प्रकाश नामक साप्ताहिक अखबार की शुरुआत की. इस अखबार की शुरुआत के बाद अब वे हर तरह के दवाब से मुक्त हो गए और उस समय के दकियानूसी, रूढ़िवादी समाज की अपने लेखों के माध्यम से परतें खोलने लगे. 

लेख ने मचा दिया तहलका 

इस दौरान करसनदास मुलजी ने 21 अक्तूबर 1860 को साप्ताहिक प्रकाशित होने वाले अखबार सत्य प्रकाश में एक लेख छापा. इस लेख का शीर्षक था हिंदुओं नो असली धरम अने अत्यार ना पाखंडी मातो (हिंदुओं का सच्चा धर्म और वर्तमान पाखंडी मत)'. इस लेख में उन्होंने तत्कालीन वैष्णव संप्रदाय पुष्टिमार्ग के प्रमुख धार्मिक संत जदुनाथजी बृजरतनजी महाराज के कथित यौन दुराचार खुलासा किया था. इस लेख में मुलजी ने महाराज पर आरोप लगाया था कि वे धार्मिक मान्यताओं की आड़ में अपनी महिला अनुयायियों का शोषण करते हैं. जदुनाथ महाराज केवल संत ही नहीं बल्कि एक बड़े धर्मिक प्रभाव वाले नेता थे,जिनके बड़े पैमाने पर अनुयायी थे. 

मानहानि का ठोका केस 

करसनदास मुलजी के इस लेख से क्रोधित होकर जदुनाथ महाराज ने उन पर और सत्य प्रकाश अखबार के प्रकाशक नानाभाई रुस्तमजी रानीना पर मानहानि का केस दायर कर दिया. इस केस में उन्होंने उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए मुलजी पर 50 हजार रुपये  ( आज के लगभग 82 लाख रुपये ) मानहानि का दावा ठोक दिया.महाराज ने अपने केस में दावा किया कि मुलजी के आरोप झूठे, बेबुनियाद,निंदनीय और अपमाजनक हैं. वहीं, इस लेख को लिखने वाले मुलजी का कहना था कि इस लेख में सभी बातें सत्यता पर आधारित हैं. 

धर्म से बहिष्कृत करने का चला अभियान 

इस मामले की सबसे खास बात यह थी कि करसनदास मुलजी खुद एक पुष्टमार्गी व्यापारिक परिवार से आते थे. इस संप्रदाय को मानने वाले लोग बेहद धनी थे जो विशेष तौर पर मुंबई में तब के बॉम्बे में रहते थे. करसनदास मुलजी के विरोध में महाराज जदुनाथ ने एक अभियान चलाया जिसमें चेतावनी दी गई कि कोर्ट में जो भी उनके खिलाफ गवाही देगा उसे धर्म से बहिष्कृत कर दिया जाएगा. 

कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला? 

इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर पूरी तरह से भर गया था. ब्रिटिश न्यायधीशों ने महाराज जदुनाथ के मानहानि दावे को खारिज कर दिया और अपने फैसले में कहा कि मुलजी ने अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त सबूत और तथ्य पेश किए हैं. मामले की सुनवाई कर रहे जज जोसेफ अर्नोल्ड ने अपने शब्दों में कहा कि एक पत्रकार एक शिक्षक की तरह काम करता है जो लोगों का उत्थान और उनके ज्ञान की सीमा में वृद्धि करता है. जज ने अपने निर्णय में कहा कि धार्मिक विचारधारा को मानने की बात नहीं है, यहां सवाल नैतिकता का है जो नैतिक रूप से गलत है तो वह धर्म के हिसाब से भी गलत ही होगा. उसे सही नहीं कहा जा सकता.इस दौरान जज ने करसनदास मुलजी की हिम्मत की मिसाल दी. जज ने कहा कैसे उन्होंने शक्तिशाली धर्म गुरुओं के खिलाफ मोर्चा खोला और उनके खिलाफ आवाज उठाई. कोर्ट ने इस मामले को खारिज करते हुए को 11,500 रुपये करसनदास मुलजी हर्जाना देने का आदेश दिया.इस केस में मुलजी के 14,000 रुपये खर्च हो गए थे. 22 अप्रैल 1862 को इस मामले के निर्णय ने बता दिया कि कानून की नजरों में सब बराबर हैं.इस मामले ने कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को भी स्थापित किया. 

अब कोर्ट क्यों कर रहा सुनवाई? 

यह मामला लंबे समय से भुला दिया गया था हाल ही में गुजरात उच्च न्यायालय ने यशराज फिल्म्स (YRF) द्वारा निर्मित और आमिर खान के बेटे जुनैद खान अभिनीत नेटफ्लिक्स फिल्म महाराज की रिलीज पर रोक लगा दी.फिल्म में जयदीप अहलावत धार्मिक नेता जदुनाथ महाराज की भूमिका निभा रहे हैं. वहीं, आमिर खान के बेटा जुनैद खान करसनदास मुलजी की भूमिका निभा रहे हैं.वल्लभाचार्य और भगवान श्री कृष्ण के अनुयायियों की ओर से इस फिल्म पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.अनुयायियों का कहना था कि इस फिल्म की रिलीज से सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है और हिंदू धर्म के अनुयायियों के खिलाफ हिंसा को भड़का सकता है.  इस फिल्म पर हाईकोर्ट अब 18 जून को सुनवाई करेगा.