पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के दौरान कांग्रेस ने मतदान प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने दोनों सीटों पर पूरी तरह दोबारा मतदान कराने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह मतदाताओं को डराया गया और कांग्रेस के पोलिंग एजेंटों को बूथों से बाहर किया गया.
शुभंकर सरकार ने कोलकाता स्थित कांग्रेस मुख्यालय में दावा किया कि रेजीनगर के 100 से अधिक बूथों से पार्टी एजेंटों को कथित तौर पर जबरन बाहर निकाला गया. उनका आरोप है कि कई एजेंटों के साथ मारपीट भी हुई. रेजीनगर से कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी ने स्थानीय पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देकर उपचुनाव रद्द करने और फिर से मतदान कराने की मांग की.
नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने भी मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों और पोलिंग एजेंटों पर दबाव बनाया गया तथा पुलिस और केंद्रीय बलों ने उनकी आवाजाही रोकने की कोशिश की. प्रधान ने यह भी दावा किया कि उन्हें लाठियों से पीटा गया. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नंदीग्राम के कई बूथों पर सत्तारूढ़ BJP का प्रभाव रहा और विपक्षी एजेंटों को काम करने में बाधा पहुंचाई गई. उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाई. हालांकि, BJP ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही.
उपचुनाव से कुछ घंटे पहले चुनाव आयोग ने नंदीग्राम थाने के प्रभारी अधिकारी को बदल दिया था. आयोग ने अजॉय कुमार मिश्रा की जगह देबाशीष सरकार को नया प्रभारी नियुक्त किया. नंदीग्राम और रेजीनगर में कुल 71 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी और सभी बूथों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था थी.
नंदीग्राम और रेजीनगर में मतदान मंगलवार सुबह 7 बजे शुरू हुआ. दोनों सीटों के उपचुनाव के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाने हैं. मतदान के दौरान विपक्षी दलों की शिकायतों और BJP के इनकार के बीच चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. अंतिम तौर पर किसी बूथ या पूरी सीट पर दोबारा मतदान का फैसला चुनाव आयोग की जांच और प्रक्रिया के आधार पर होगा.