पिछले दस वर्षों में मुंबई ने तेज़ी से बदलाव देखा है. लंबे समय तक अधूरी पड़ी योजनाएं अब ज़मीन पर उतरती दिख रही हैं. इस बदलाव के पीछे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बना वह विज़न है, जिसका उद्देश्य मुंबई को एक बेहतर, सुविधाजनक और आधुनिक शहर बनाना था. इस सोच का सीधा फायदा आम लोगों को रोज़मर्रा की यात्रा, आवास और रोजगार के रूप में मिला है.
कनेक्टिविटी बनी विकास की रीढ़
मुंबई जैसे बड़े शहर में सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक और समय की बर्बादी रही है. फडणवीस सरकार ने सड़क, मेट्रो, रेलवे और समुद्री रास्तों को जोड़ने वाले एक साझा परिवहन ढांचे पर काम किया. इससे यात्रा आसान और तेज़ हुई.
अटल सेतु: नई राह, नई रफ्तार
मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक, जिसे अटल सेतु कहा जाता है, दक्षिण मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ता है. इस पुल से न सिर्फ सफर का समय घटा है, बल्कि उद्योग, व्यापार और लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा मिला है. अब पुणे और गोवा की ओर जाना भी आसान हो गया है.
कोस्टल रोड और ट्रैफिक से राहत
कोस्टल रोड प्रोजेक्ट ने दक्षिण मुंबई की पुरानी ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक कम किया है. इससे ईंधन की बचत हुई है और प्रदूषण भी घटा है. साथ ही पर्यावरण संतुलन का भी ध्यान रखा गया है.
मेट्रो विस्तार से बदली रोज़ की यात्रा
मेट्रो लाइन 2A, 7 और 3 के शुरू होने से लाखों यात्रियों को राहत मिली है. इससे लोकल ट्रेनों पर दबाव कम हुआ और समय की बचत हुई. मेट्रो स्टेशनों के आसपास नए घर और दफ्तर भी विकसित हो रहे हैं.
आवास और पुनर्विकास पर फोकस
धारावी और BDD चाल जैसे इलाकों में पुनर्विकास योजनाएं शुरू की गईं, ताकि लोगों को सुरक्षित घर और बेहतर सुविधाएं मिल सकें. सरकार का लक्ष्य रहा कि विकास सिर्फ खास इलाकों तक सीमित न रहे.
आर्थिक और डिजिटल विकास
नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी पार्क्स से मुंबई की पहचान एक ग्लोबल फाइनेंशियल और टेक हब के रूप में मजबूत हुई है.
आज की मुंबई पहले से ज़्यादा जुड़ी हुई, तेज़ और रहने लायक बन रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और समावेशी विकास ने शहर को नई दिशा दी है. देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में शुरू हुआ यह मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन रहा है.