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MUDA Land Scam Case: कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ चलेगा मुकदमा, जानें क्या है पूरा मामला

MUDA Land Scam Case: कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण साइट आवंटन घोटाले के संबंध में सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. सामाजिक कार्यकर्ता टीजे अब्राहम ने इसके लिए याचिका दायर की थी. मामला 50:50 योजना के तहत सिद्धारमैया की पत्नी को आवंटित भूमि को लेकर है. सीएम ने पहले भरोसा जताया था कि राज्यपाल याचिका खारिज कर देंगे.

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MUDA Land Scam Case: कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ चलेगा मुकदमा, जानें क्या है पूरा मामला
Courtesy: social media

MUDA Land Scam Case: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है. मामला मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) साइट आवंटन घोटाले से जुड़ा है. सामाजिक कार्यकर्ता और वकील टीजे अब्राहम की ओर से राज्यपाल के समक्ष याचिका दायर की गई थी. याचिका में बीएम पार्वती (मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी) को आवंटित भूमि से संबंधित मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी गई थी.

इससे पहले सिद्धारमैया ने भरोसा जताया था कि राज्यपाल उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर देंगे. मैसूर में पत्रकारों से बात करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि सब कुछ कानूनी है. उम्मीद नहीं है, मुझे पूरा भरोसा है कि वे (राज्यपाल) सरकार के जवाब को स्वीकार करेंगे क्योंकि चीजें कानूनी हैं. वे (राज्यपाल) संविधान के प्रमुख हैं, जब चीजें संविधान के अनुसार हैं, तो वे क्यों नहीं स्वीकार करेंगे? मुझे पूरा भरोसा है कि वे स्वीकार करेंगे.

क्या है MUDA घोटाला मामला?

ये घोटाला तब सामने आया जब केसारे गांव में 3.16 एकड़ भूमि के मूल मालिक ने मैसूर के डिप्टी कमिश्नर (DC) से अपनी भूमि वापस लेने के लिए याचिका दायर की. विवादित जमीन 2005 में सीएम सिद्धारमैया के साले (पत्नी के भाई) को ट्रांसफर की गई थी. हालांकि, भूमि को लेकर विवाद तब और गहरा गया जब यह बात सामने आई कि सीएम सिद्धारमैया की पत्नी बीएम पार्वती को MUDA की ओर से चलाई जा रही 50:50 योजना के तहत इस भूमि के मुआवजे के रूप में 2022 में मैसूर में 14 प्रीमियम साइटें आवंटित की गई थीं. 

मामले को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे हैं सिद्धारमैया

सिद्धारमैया को मैसूर में अपनी पत्नी को 14 आवासीय स्थल आवंटित करने से संबंधित कथित भूमि सौदे के साथ-साथ अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए राज्य विकास निगम से 89.73 करोड़ रुपये की चोरी के लिए विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

राज्यपाल की ओर से मुकदमा चलाने की अनुमति पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रमेश बाबू ने कहा कि राज्यपाल की सहमति येदियुरप्पा मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ है, पक्षपातपूर्ण है और एक साजिश का हिस्सा है. कांग्रेस राज्यपाल के कदम को निष्प्रभावी बनाने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू करेगी. उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार सोमवार को इस मंजूरी को उच्च न्यायालय में चुनौती देगी.

किसी भी कथित भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ निजी शिकायत दर्ज करने के लिए राज्यपाल की मंजूरी की जरूरत होती है. अदालत में दायर निजी शिकायतों और राज्यपाल की ओर से दी गई मंजूरी के आधार पर अदालत तय करेगी कि मामले में एफआईआर दर्ज की जा सकती है या नहीं. इससे पहले राज्यपाल ने एक निजी शिकायतकर्ता टीजे अब्राहम को आज राजभवन में उपस्थित होने को कहा था.