उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) ने कौशल प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बड़ी कार्रवाई की है. मिशन ने ऐसे 500 से अधिक ट्रेनिंग पार्टनर्स को तीन वर्षों के लिए डिबार कर दिया है, जिन्हें प्रशिक्षण लक्ष्य आवंटित किए जाने के बावजूद उन्होंने एक भी प्रशिक्षु को प्रशिक्षण नहीं दिया. इस निर्णय के बाद ये संस्थाएं वर्ष 2028-29 तक मिशन की किसी भी योजना या नए प्रशिक्षण आवंटन में हिस्सा नहीं ले सकेंगी.
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन प्रदेश के 14 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराता है. इसके तहत सरकारी, निजी, औद्योगिक और स्टार्टअप श्रेणी की संस्थाओं को प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में सूचीबद्ध किया जाता है. समय-समय पर इन्हें अलग-अलग प्रशिक्षण लक्ष्य दिए जाते हैं, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराया जा सके. मिशन की समीक्षा में कई निजी संस्थान और कुछ स्टार्टअप पूरी तरह निष्क्रिय पाए गए.
मिशन के अधिकारियों के अनुसार, कई प्रशिक्षण केंद्रों द्वारा आवंटित लक्ष्य के बावजूद प्रशिक्षण शुरू नहीं करने से कौशल विकास कार्यक्रमों की गति प्रभावित हो रही थी. इससे न केवल संसाधनों का उचित उपयोग नहीं हो पा रहा था, बल्कि युवाओं तक प्रशिक्षण अवसर पहुंचाने में भी बाधा आ रही थी. इसी कारण यह फैसला लिया गया कि निष्क्रिय संस्थाओं को हटाकर सक्रिय और बेहतर प्रदर्शन करने वाले केंद्रों को प्राथमिकता दी जाए.
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने डिबार किए गए सभी प्रशिक्षण साझेदारों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी जारी कर दी है. इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों, प्रशिक्षण प्रदाताओं और संबंधित पक्षों को पारदर्शी तरीके से जानकारी उपलब्ध कराना है. इससे प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को यह पता चल सकेगा कि कौन-कौन सी संस्थाएं अब मिशन के अंतर्गत मान्यता प्राप्त नहीं हैं.
मिशन का कहना है कि यह कार्रवाई प्रशिक्षण व्यवस्था को बाधित करने के लिए नहीं, बल्कि उसे अधिक परिणामोन्मुख और प्रभावी बनाने के लिए की गई है. अधिकारियों का मानना है कि निष्क्रिय संस्थाओं के बाहर होने से प्रशिक्षण लक्ष्य उन केंद्रों को मिलेंगे जो वास्तव में काम कर रहे हैं. इससे युवाओं को बेहतर संसाधन, नियमित प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे कौशल विकास कार्यक्रमों की सफलता और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे.