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जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव राज्यसभा में स्वाकार नहीं, धनखड़ के इस्तीफे की था बड़ी वजह

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अब न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करेंगे और यदि पर्याप्त कारण पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश करेंगे.

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Edited By: Mayank Tiwari
जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव राज्यसभा में स्वाकार नहीं, धनखड़ के इस्तीफे की था बड़ी वजह
Courtesy: Social Media

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. मार्च में उनके दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यरत रहते हुए उनके आवास पर जली हुई नकदी के ढेर मिलने के बाद यह कार्रवाई हो रही है. सूत्रों ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा प्रायोजित महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया जाएगा.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अब जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करेंगे. यदि समिति को पर्याप्त आधार मिलता है, तो वह उनके महाभियोग की सिफारिश करेगी. सूत्रों के अनुसार, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा स्वीकार किए गए विपक्ष-समर्थित प्रस्ताव को रद्द कर दिया जाएगा, क्योंकि इसे राज्यसभा में औपचारिक रूप से पेश नहीं किया गया था. धनखड़ के इस कदम से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नाराज हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

सरकार की रणनीति और राजनीतिक मंशा

दरअसल, बुधवार को सरकार ने एक बैठक में भ्रष्टाचार विरोधी छवि को मजबूत करने की रणनीति बनाई. बीजेपी इस मामले में अगुआ बनकर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दिखाना चाहती है, खासकर बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले. सरकार ने संसद के मानसून सत्र, जो 21 जुलाई से शुरू हुआ, से पहले महाभियोग प्रस्ताव तैयार किया था. बीजेपी ने विपक्षी दलों से संपर्क कर सर्वदलीय सहमति बनाई, और कुछ विपक्षी सांसदों ने सरकार के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी किए.

हालांकि, धनखड़ द्वारा विपक्ष के प्रस्ताव का जिक्र करने से सरकार की योजना को झटका लगा. सूत्रों ने बताया कि यह “सर्वदलीय सहमति का उल्लंघन” था, क्योंकि सभी दल इस मुद्दे पर एकजुट थे. सरकार के सूत्रों ने कहा, “यदि धनखड़ ने हमें अपनी मंशा के बारे में पहले सूचित किया होता, तो सत्तारूढ़ दल के सांसद उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते, जिससे बीजेपी इस महाभियोग प्रक्रिया पर सार्वजनिक नियंत्रण बनाए रखती.

धनखड़ का इस्तीफा और नया उपराष्ट्रपति

धनखड़ के विपक्षी प्रस्ताव का उल्लेख उनके आकस्मिक इस्तीफे का प्रमुख कारण माना जा रहा है. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया. इस बीच, निर्वाचन आयोग ने नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है. आयोग के सूत्रों के अनुसार, अगस्त के अंतिम सप्ताह तक भारत को नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा.