मोदी सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को पूरी तरह नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए सरकार आतंकवाद और नक्सलवाद की तर्ज पर नशे के खतरे को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.
शाह ने बताया कि इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए एनसीसी, एनएसएस और 'माय भारत' प्लेटफॉर्म के माध्यम से 1 लाख 'नशामुक्त मित्र' प्रशिक्षित किए जाएंगे. इसके साथ ही, देश के सभी शैक्षणिक संस्थानों और परिसरों को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है.
We are resolved to build a drug-free India. Addressing a press conference in Goa, on control of narcotics. https://t.co/4NR4XwmhjS
— Amit Shah (@AmitShah) September 6, 2026
सरकार 27 मार्च तक हर राज्य में पूर्ण रूप से सुसज्जित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की स्थापना करेगी. फोरेंसिक रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी. यह पूरा अभियान मुख्य रूप से चार पिलर्स- प्रवर्तन, सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, मांग में कमी और क्षमता निर्माण पर आधारित है.
गृह मंत्रालय और एनसीबी के नेतृत्व में 100 अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त करने और विदेश भागे 100 ड्रग भगोड़ों को वापस लाने का लक्ष्य रखा गया है. कमर्शियल मात्रा वाले मामलों में वित्तीय जांच की जाएगी और मुख्य सरगनाओं के खिलाफ सख्त डोजियर तैयार किए जाएंगे.
ड्रग माफियाओं की वित्तीय रीढ़ तोड़ने के लिए सीबीआई, ईडी और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को तैनात किया गया है. हवाई अड्डों और कार्गो टर्मिनलों पर विशेष स्कैनर लगाए जाएंगे. साथ ही, अगले तीन सालों में 100 अवैध ड्रग प्रयोगशालाओं को नष्ट करने का लक्ष्य है.