नई दिल्ली: भारतीय संघ के नक्शे पर अब एक भाषाई बदलाव आधिकारिक होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दक्षिण भारतीय राज्य केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई. इस फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह कदम राज्य के भाषाई गौरव और संस्कृति को सम्मान देने की दिशा में उठाया गया है.
यह बैठक कई मायनों में यादगार रही. दरअसल, नए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) भवन 'सेवा तीर्थ' के उद्घाटन के बाद वहां आयोजित यूनियन कैबिनेट की यह पहली बैठक थी. इसी नई इमारत में लिए गए पहले बड़े फैसले के जरिए केरल की जनता की उस मांग को पूरा किया गया, जो भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के समय से ही उठ रही थी. मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि जब से भाषा के आधार पर राज्यों का निर्माण हुआ है, तभी से यह मांग की जा रही थी कि राज्य का नाम उसकी मूल पहचान 'केरलम' के अनुरूप होना चाहिए.
Union Cabinet approves the proposal for alteration of name of State of ‘Kerala’ as ‘Keralam’ pic.twitter.com/uVydvy5fFl
— ANI (@ANI) February 24, 2026Also Read
विधानसभा के दो प्रस्ताव और सीएम की जिद
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन इस बदलाव के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे. केरल विधानसभा ने सबसे पहले अगस्त 2023 में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था. हालांकि, उस समय केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी खामियों और बदलावों का सुझाव दिया था. इसके बाद, 24 जून 2024 को विधानसभा ने दूसरी बार आम सहमति से संशोधित प्रस्ताव पारित कर केंद्र से आग्रह किया कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' कर दिया जाए.
इस फैसले को राजनीतिक विशेषज्ञ राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देख रहे हैं. इस साल होने वाले केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा नाम बदलने की मांग को स्वीकार करना एक बड़ा सियासी कदम माना जा रहा है. यह निर्णय न केवल राज्य की भाषाई अस्मिता को संतुष्ट करेगा, बल्कि चुनावी समर में भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर उभरेगा.