पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकर, उनके साथ राजनीतिक भेदभाव कर रही है. नीति आयोग की बैठक में उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार का रवैया सौतेला है. नीति आयोग की बैठक में जहां अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बोलने का मौका दिया गया, ममता का कहना है कि उनका माइक ही बंद कर दिया गया. दिल्ली में हुई इस बैठक से ममता बनर्जी बेहद नाराज हैं. उन्होंने सरकार पर विपक्ष से भेदभाव करने का आरोप लगाया है.
ममता बनर्जी ही इकलौती ऐसी मुख्यमंत्री थीं, जो नीति आयोग की बैठक में शामिल हुई हैं. इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं ने इस बैठक से किनारा कर लिया था. सबने बैठक का बहिष्कार किया था. मीटिंग चलने के दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनका माइक म्युट कर दिया. केंद्र सरकार ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया है. केंद्र का कहना है कि ममता बनर्जी को बोलने का पूरा अवसर दिया गया था.
केंद्र सरकार की ओर से प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने उनकी बैठक को लेकर किए गए दावे का फैक्ट चेक भी किया है. ममता बनर्जी ने कहा था, 'मैं आपसे कहती हूं कि आपको राज्य सरकारों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए. मैं बोलना चाहती थी लेकिन मेरे माइक को म्यूट कर दिया गया. मुझे सिर्फ 5 मिनट बोलने का मौका किया, वहीं मुझसे पहले आए लोगों ने 10 से 12 मिनट तक बोला. मैं इकलौती विपक्ष की नेता थी, जिन्होंने इसमें हिस्सा लिया था लेकिन तब भी मुझे बोलने नहीं दिया गया. यह अपमानजनक है.'
इंडिया ब्लॉक के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए थे. PIB की फैक्ट चेक टीम ने लिखा, 'यह दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का माइक, नीति आयोग की बैठक के दौरान म्यूट कर दिया गया था. यह दावा भ्रामक है. घड़ी की सूइयां इशारा कर रही थीं कि उनका समय पूरा हो चुका है. यहां तक कि इसे बताने के लिए बेल भी नहीं बजाई गई थी.'
ममता बनर्जी ने कोलकाता पहुंचकर शनिवार को दावा किया कि बार-बार बेल बजाई जा रही थी. विपक्ष की इकलौती नेता होने के बाद भी उन्हें बैठक में बोलने का अधिकार नहीं दिया गया. यह एक संघीय सरकार का काम नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा, 'मैं सोच रही थी कि विपक्षी राज्यों के निर्देश पर मैं बोलूंगी. हमें कोई आपत्ति नहीं है कि दूसरे राज्यों को पैसे मिल रहे हैं लेकिन आप हमें वंचित नहीं रख सकते. राज्यों को सब कुछ देखना पड़ता है. अगर आप राज्यों को दिव्यांग बना देंगे, तब केंद्र भी दिव्यांग हो जाएगा.'
उन्होंने कहा, 'आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू को 20 मिनट बोलने दिया गया. 4 अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को 15 मिनट बोलने दिया गया लेकिन जैसे ही मैंने 5 मिनट से ज्यादा बोला, मुझे बोलने नहीं दिया गया. मुझे बार-बार रुकने को कहा गया. मैंने कहा कि मैं बहिष्कार करूंगी अगर आपने बोलने नहीं दिया. मुझे 30 मिनट बोलने का मौका मिलना चाहिए था, मैं विपक्ष की इकलौती नेता थी. मैं 6 बार सांसद रह चुकी हूं, सीनियर नेता हूं मैं बोलना चाहती थी. मुझे बोलने नहीं दिया गया. क्या यह अपमानजनक नहीं है कि बार-बार बेल बजाई जा रही थी.' ममता बनर्जी के आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि वे झूठ बोल रही हैं.