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ममता बनर्जी को एक और झटका, TMC सांसद सुष्मिता देव ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा

ममता बनर्जी को सुष्मिता देव इस्तीफा से बड़ा झटका लगा है. राज्यसभा से इस्तीफा देकर उन्होंने बगावत संकट को और बढ़ाया, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया है.

Shilpa Shrivastava
ममता बनर्जी को एक और झटका, TMC सांसद सुष्मिता देव ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा
Courtesy: X (@SushmitaDevAITC)

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है. पार्टी की सीनियर नेता सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को सौंपा. अपने इस्तीफे के पत्र में सुष्मिता देव ने लिखा: "मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देती हूं, जिसे कृपया तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए." 

उन्होंने सदस्य के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए उपराष्ट्रपति, उप-सभापति और राज्यसभा सचिवालय के सभी कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया. इस्तीफा सौंपने के कुछ ही मिनटों बाद, सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की. इस अचानक हुई मुलाकात से जोरदार अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकती हैं.

TMC को दूसरा बड़ा झटका:

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है. इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय ने भी इस्तीफा दिया था. पार्टी अभी गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है. संसद में स्थिति और भी खराब है. टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने पार्टी के ख़िलाफ बगावत की और सत्ताधारी एनडीए का समर्थन किया. इससे राष्ट्रीय संसद में ममता बनर्जी की स्थिति काफी कमजोर हो गई है.

टीएमसी की मुश्किलें सिर्फ संसद तक ही सीमित नहीं हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी बड़े पैमाने पर बगावत हुई, जहां खबरों के अनुसार 58 विधायकों ने बागी नेता रिताब्रता बनर्जी का समर्थन किया. लगातार मिल रहे इन झटकों ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर भारी दबाव बना दिया है.

कौन हैं सुष्मिता देव?

सुष्मिता देव असम की एक जानी-मानी राजनीतिक नेता हैं. वह पहले कांग्रेस के टिकट पर सिलचर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद थीं. 2019 का चुनाव हारने के बाद, वह 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गईं. पार्टी में तेजी से आगे बढ़ते हुए वह राष्ट्रीय प्रवक्ता बनीं. बाद में, उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया. उनके इस्तीफे और हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मुलाक़ात ने राजनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा छेड़ दी है. कई लोगों का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में और भी नेता पार्टी छोड़ सकते हैं.