नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है. बारासात से तृणमूल कांग्रेस सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तिदार के बेटे और प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित पार्टी के पांच वरिष्ठ नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा है. इस नोटिस में उन्होंने अपने और अपने परिवार के खिलाफ दिए गए कथित बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी की मांग की है.
डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी भी बारासात विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने या पार्टी टिकट प्राप्त करने की इच्छा नहीं जताई. उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने और टिकट मांगने संबंधी दावे पूरी तरह झूठे, मनगढ़ंत और भ्रामक हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं द्वारा उनके बारे में गलत जानकारी फैलाकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है.
कानूनी नोटिस में दावा किया गया है कि इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) और बारासात जिला टीएमसी के तत्कालीन अध्यक्ष सोहम पाल ने स्वयं उनसे कई बार संपर्क किया था. नोटिस के अनुसार, व्हाट्सएप संदेशों और फोन कॉल के जरिए उन्हें चुनाव लड़ने और विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया था. इसलिए टिकट मांगने के आरोपों का कोई आधार नहीं है.
डॉ. बैद्यनाथ ने पूर्व विधायक सोनाली गुहा के उस बयान पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है, जिसमें कथित रूप से कहा गया था कि वह, उनके भाई और उनकी मां नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं. उन्होंने इस आरोप को पूरी तरह निराधार और अपमानजनक बताया है. उनका कहना है कि ऐसे बयान न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि उनके पेशेवर जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं.
एडवोकेट पूजा शुक्ला के माध्यम से भेजे गए इस नोटिस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सांसद कल्याण बनर्जी, सांसद सौगत रॉय, सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व विधायक सोनाली गुहा को संबोधित किया गया है. नोटिस में सभी नेताओं से कहा गया है कि वे भविष्य में डॉ. बैद्यनाथ और उनके परिवार के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष टिप्पणी करने से बचें.
साथ ही नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई और कथित बयान वापस नहीं लिए गए, तो डॉ. बैद्यनाथ सिविल और आपराधिक मानहानि सहित उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का सहारा लेंगे. इस घटनाक्रम ने टीएमसी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान को एक नया मोड़ दे दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले पर सभी की नजरें बनी रहेंगी.