महाराष्ट्र में सियासी ड्रामा: पोस्टर लगाकर अपने ही पार्षदों को क्यों ढूंढ रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना?

महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली में नगर निगम चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के चार पार्षद लापता हैं. पार्टी ने पोस्टर लगाकर उन्हें खोजने की अनोखी मुहिम शुरू की है.

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Kuldeep Sharma

मुंबई: महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव नतीजे सामने आने के बाद सियासी उठापटक तेज हो गई है. खासकर कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिल रही है. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के चार नवनिर्वाचित पार्षद चुनाव जीतने के तुरंत बाद लापता हो गए हैं. उनसे न फोन पर संपर्क हो पा रहा है और न ही वे अपने घरों पर मौजूद हैं. इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है.

पोस्टर लगाकर पार्षदों की तलाश

उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने अपने लापता पार्षदों को ढूंढने के लिए शहर में पोस्टर लगाए हैं. इन पोस्टरों में मधुर म्हात्रे, कीर्ति ढोणे, राहुल कोट और स्वप्नाली केने के नाम और तस्वीरें हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि मतदाताओं को जवाब देना इन पार्षदों की जिम्मेदारी है. कई कोशिशों के बावजूद उनका कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया, जिससे पार्टी को यह असामान्य कदम उठाना पड़ा.

संख्या बल और मेयर की जंग

122 सदस्यीय कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में सत्ता संतुलन बेहद नाजुक है. शिंदे गुट को 52 और बीजेपी को 51 सीटें मिली हैं. मेयर पद के लिए 62 पार्षदों का समर्थन जरूरी है. शिवसेना (यूबीटी) के 11 पार्षदों में से चार का लापता होना समीकरण बदल सकता है. इसी कारण राजनीतिक दलों के बीच जोड़-तोड़ की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

पोचिंग की आशंका और राजनीतिक आरोप

शिवसेना यूबीटी के खेमे में आशंका जताई जा रही है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना इन पार्षदों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणामों के तुरंत बाद इस तरह का गायब होना संदेह पैदा करता है. यही वजह है कि यह मामला सिर्फ गुमशुदगी तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक नैतिकता से भी जुड़ गया है.

परिजनों के बयान क्या कहते हैं

मधुर म्हात्रे के पिता उमेश म्हात्रे ने दावा किया कि उनका बेटा परिवार के संपर्क में है, लेकिन वह अपनी लोकेशन साझा नहीं कर सकता. उन्होंने शिंदे गुट से किसी भी तरह के समझौते से इनकार किया है. वहीं, कीर्ति ढोणे के पड़ोसियों का कहना है कि वे चुनाव के बाद से घर पर नहीं दिखीं. बाकी दो पार्षदों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है.

पार्टी की चेतावनी और अगला कदम

शिवसेना यूबीटी के कल्याण शहर अध्यक्ष बाला परब ने कहा कि पार्टी कुछ पार्षदों के संपर्क में है और संभव है वे किसी कारणवश बाहर हों. हालांकि उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर कोई पार्षद शिंदे गुट में शामिल होता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू होगी. इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है.