US Israel Iran War

धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर आई अमेरिकी रिपोर्ट को भारत ने नकारा, कहा- यह कतई स्वीकार नहीं

भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता पर आई अमेरिकी रिपोर्ट को सख्ती से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय का कहना है कि रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है और तथ्यों पर आधारित नहीं है, जिससे आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं.

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Sagar Bhardwaj

भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंध मजबूत माने जाते हैं, लेकिन हाल ही में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी एक रिपोर्ट को लेकर नया विवाद सामने आया है. अमेरिका के एक आयोग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत से जुड़े कई मुद्दों पर टिप्पणी की है. इस पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रिपोर्ट में देश की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ऐसी रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करता और इसे तथ्यों से दूर बताया है.

रिपोर्ट पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत इस रिपोर्ट में पेश किए गए निष्कर्षों से सहमत नहीं है. उनका कहना था कि आयोग लंबे समय से भारत की स्थिति को एकतरफा तरीके से दिखा रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट तैयार करते समय विवादित स्रोतों और वैचारिक दृष्टिकोण पर ज्यादा भरोसा किया गया है, जिससे वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती. भारत का मानना है कि इस तरह की प्रस्तुति किसी भी निष्पक्ष विश्लेषण के अनुरूप नहीं है.

 आयोग की रिपोर्ट में क्या कहा गया

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राज्य आयोग की ताजा रिपोर्ट में भारत से जुड़े कई सुझाव दिए गए हैं. इसमें अमेरिका सरकार से कहा गया है कि वह भारत के कुछ संगठनों और संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर विचार करे. रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अनुसंधान एवं विश्लेषण विंग (RAW) की गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए इन पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है. इसके अलावा भारत को हथियारों की बिक्री और भविष्य के रक्षा सहयोग को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ने का सुझाव भी दिया गया है.

भारत ने उठाए दूसरे मुद्दे

भारत सरकार का कहना है कि आयोग को केवल भारत की आलोचना करने के बजाय अपने देश में हो रही घटनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए. विदेश मंत्रालय के अनुसार हाल के वर्षों में अमेरिका में कई हिंदू मंदिरों पर हमले और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं. इसके अलावा भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ असहिष्णुता और धमकी के मामलों पर भी चिंता जताई गई है. भारत का मानना है कि इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा जरूरी है.

 संबंधों पर असर की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी रिपोर्टें अक्सर राजनीतिक और कूटनीतिक बहस को जन्म देती हैं. हालांकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंध काफी गहरे हैं. भारत ने साफ किया है कि वह अपने लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है. सरकार का कहना है कि देश में सभी नागरिकों को कानून के तहत धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है और इसे लेकर किसी भी तरह की गलत धारणा स्वीकार नहीं की जाएगी.