US Israel Iran War

'हफ्ते भर में होगा अंत', ट्रम्प ने किया ईरान की तबाही के काउंटडाउन का दावा; खामेनेई ने दी पाई-पाई का हिसाब लेने की धमकी

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जुबानी जंग चरम पर पहुंच गई है. जहां ट्रंप युद्ध के जल्द अंत का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान ने कड़े प्रतिरोध की चेतावनी दी है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ गया है क्योंकि ईरान और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व ने एक-दूसरे के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपना लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान की स्थिति कमजोर है और वह शांति के लिए बेचैन हो रहा है. दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके देश को हुए हर नुकसान का हिसाब दुश्मन से लिया जाएगा. 

ईरान के सुप्रीम लीडर ने टेलीग्राम संदेश के जरिए कड़ा रुख स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि यदि क्षतिपूर्ति नहीं दी गई, तो ईरान विरोधी पक्ष की उतनी संपत्ति जब्त करेगा जितनी वह सही समझेगा. मोजतबा ने साफ किया कि तेहरान अपने शहीदों के खून का बदला लेने से कभी पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने होर्मुज जलमार्ग को दुश्मन के लिए बंद रखने की रणनीतिक प्रतिबद्धता दोहराई है. ईरान अब बराबरी की चोट पहुंचाने की नीति पर काम कर रहा है.

ट्रंप का एक हफ्ते का दावा 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध के बहुत जल्द समाप्त होने की भविष्यवाणी की है. उनके अनुसार, ईरान को इतना भीषण नुकसान पहुंचाया गया है कि उसे दोबारा खड़ा होने में कम से कम एक दशक का समय लगेगा. ट्रंप का मानना है कि अमेरिका चाहे तो अभी अपनी जीत की घोषणा कर सकता है, लेकिन वे कुछ दिन और इंतजार करना चाहते हैं. उन्होंने दावा किया कि ईरान की बची-खुची सैन्य ताकत भी अब अंतिम सांसें ले रही है.

खार्ग द्वीप की तबाही 

ट्रंप ने मौजूदा सैन्य स्थिति का विवरण देते हुए कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुका है. वहां अब तेल ढांचे का केवल एक मामूली हिस्सा बचा है, जिसे अमेरिकी सेना महज पांच मिनट में मलबे में तब्दील करने की क्षमता रखती है. ट्रंप के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व अब युद्धविराम के लिए छटपटा रहा है, हालांकि वे अभी बातचीत की मेज पर आने की मानसिक स्थिति में नहीं दिख रहे हैं.

ईरान का तीखा पलटवार 

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वाशिंगटन के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को किसी भी मुगालते में रहने की जरूरत नहीं है क्योंकि ईरान अंतिम दम तक अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा. अराघची ने स्पष्ट किया कि तेहरान ने कभी भी अमेरिका से शांति या बातचीत की गुहार नहीं लगाई है. उनके अनुसार, ईरान की स्थिति स्थिर और मजबूत है और यह संघर्ष खुद राष्ट्रपति ट्रंप की पसंद का परिणाम है.

सैन्य ठिकानों पर निशाना 

मोजतबा खामेनेई ने पड़ोसी मुल्कों को आश्वस्त किया है कि वे केवल उन्हीं सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएंगे जहां से उन पर हमले किए जा रहे हैं. तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह इस 'अवैध युद्ध' को रोकने के लिए अपनी तरफ से पहल नहीं करेगा. ईरान अपने पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहता है. दोनों महाशक्तियों के बीच बढ़ती यह कड़वाहट वैश्विक सुरक्षा और तेल आपूर्ति के लिए दुनिया भर में चिंता का विषय बनी हुई है.