मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में रहने वाली एक महिला रानी ओझा के साथ ऐसा वाकया हुआ है, जिसे वह उम्रभर नहीं भूल पाएगी. प्रसव पीड़ा से गुजर रही एक महिला को न तो समय पर एंबुलेंस मिल पाया, न ही डॉक्टर, जिसकी वजह से उसे अपने नवजात को गंवाना पड़ा. जिस शख्स ने बच्चे की डिलिवरी कराई, वह न तो डॉक्टर था, न मेडिकल स्टाफ था, न एएनएम न दाई. वह सफाई कर्मचारी था और उसी ने डिलवरी करा दी.
महिला के घरवालों ने एंबुलेंस को दर्जनों कॉल किए लेकिन किसी ने रिसीव ही नहीं की. महिला को आनन-फानन में एक प्राइवेट गाड़ी के जरिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया लेकिन वहां डॉक्टर ही नदारद थे. हेल्थ केयर सेंटर पर केवल महिला थी जो कि सफाई कर्मचारी थी. महिला को प्रसव पीड़ा हो रही थी, सफाई कर्मचारी ने बच्चा जन्माने में मदद की लेकिन जन्म के महज कुछ मिनटों बाद महिला ने अपने बच्चे को गंवा दिया.
खरारी गांव में हुए इस हादसे पर लोग सन्न हैं. जिले के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय रिशिश्वर ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में सफाई दी है. उन्होंने कहा कि डॉक्टर एग्जाम देने गया था इसलिए कोई डॉक्टर वहां तैनात नहीं था. जिस स्वीपर ने बच्चा जन्माने में मदद की थी, उसे निलंबित कर दिया गया है.
राम सेवक और रानी ओझा पहाड़ी गांव के रहने वाले हैं. राम सेवक बताते हैं कि पत्नी रानी को प्रसव पीड़ा रविवार सुबह शुरू हुई. वे लगातार कई बार एंबुलेंस को फोन करते रहे, किसी ने कॉल नहीं रिसीव की. जैसे-तैसे प्राइवेट गाड़ी लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां कोई डॉक्टर ही नहीं था. कोई स्टाफ नहीं था. वहीं डिलीवरी हुई लेकिन बच्चा मर गया.
एक महिला आई और वह उसे लेकर लेबर रूम में ले गई. उसने एक बच्ची को जन्म दिया. जन्म के कुछ देर बाद ही बच्ची की मौत हो गई. उन्हें बाद में पता चला कि जो महिला, पत्नी को लेकर लेबर रूम में ले गई है, वह डॉक्टर नहीं है, सफाई कर्मचारी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टर और स्टाफ रविवार को आते ही नहीं हैं.