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Madhya Pradesh: गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर 46 साल नहीं मुरझाया कमल, जानें समीकरण

गोविंदपुरा विधानसभा सीट बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का गढ़ मानी जाती है. पिछले 46 सालों से ये सीट भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य किला रही है. कांग्रेस कई बार कोशिश करने के बाद भी बीजेपी के इस गढ़ पर फतह हासिल नहीं कर पाई है.

Abhiranjan Kumar
Madhya Pradesh: गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर 46 साल नहीं मुरझाया कमल, जानें समीकरण

कांग्रेस की जीत के लिए कमलनाथ हुए एक्टिव. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस (Congress) पार्टी पूरा जोर लगा रही है. कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए खासतौर पर उन सीटों पर फोकस कर रही है जहां बीजेपी मजबूत हैं. इसी क्रम में हाल के दिनों में कांग्रेस नेता कमलनाथ (Kamal Nath) गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र (Govindpura Vidhansabha Seat) में गए थे. कमलनाथ के गोविंदपुरा दौरे का असर जनता पर कितना होगा ये तो वक्त के साथ पता चल जाएगा लेकिन यहां ये जानना जरूरी है कि इस सीट पर 46 साल से बीजेपी का कब्जा है. तो चलिए एक नजर डालते हैं इस सीट के सियासी समीकरण पर.

बीजेपी का अभेद्य किला है गोविंदपुरा विधानसभा सीट

गोविंदपुरा विधानसभा सीट बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का गढ़ मानी जाती है. पिछले 46 सालों से ये सीट भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य किला रही है. कांग्रेस कई बार कोशिश करने के बाद भी बीजेपी के इस गढ़ पर फतह हासिल नहीं कर पाई है. हर बार यहां कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है.  

क्या है सीट का इतिहास

गोविंदपुरा विधानसभा सीट के इतिहास की बात करें तो ये सीट 1967 में बनी थी. 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी. यहां से चुनाव जीतकर कांग्रेस प्रत्याशी केएल प्रधान विधानसभा पहुंचे थे. इसके बाद कांग्रेस ने 1972 के चुनाव में भी इसी सीट से जीत दर्ज की. साल 1977 में इस सीट पर कांग्रेस की हार हुई और उसके बाद से यहां से कांग्रेस लगभग गायब हो गई.

1980 में हुई थी बाबूलाल गौर की एंट्री

1977 के विधानसभा चुनाव में यहां से जनता पार्टी के प्रत्याशी लक्ष्मीनारायण शर्मा विधायक बने थे. 1980 तक बीजेपी की स्थापना हो गई थी. जिसके बाद इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार बाबूलाल गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीता था. इसके बाद गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर बाबूलाल गौर का कब्जा हो गया जिसके बाद वो यहां से कभी चुनाव नहीं हारे, गौर लगातार यहां से विधायक के रूप में 1980, 1985, 1990, 1993, 1998, 2003, 2008 और 2013 का चुनाव जीते.

गौर परिवार का दबदबा

साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भी गौर परिवार की सदस्य ने यहां से जीत दर्ज की थी. फिलहाल गोविंदपुरा विधानसभा सीट से बाबूलाल गौर की बहु कृष्णा गौर विधायक हैं. बाबूलाल गौर की बहु और बीजेपी प्रत्याशी कृष्णा गौर ने 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी गिरीश शर्मा को करीब 46 हजार वोटों से हराया था.

एक्टिव मोड में हैं कमलनाथ

2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में गोविंदपुरा सीट पर एक बार फिर सबकी नजरें होंगी. बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने यहां मोर्चा संभाल लिया है. राज्य के पूर्व सीएम कमलनाथ खुद गोविंदपुरा सीट पर एक्टिव हो गए हैं. कमलनाथ इस बार बीजेपी के इस किले को भेदने की तैयारी में जुटे हैं लेकिन ये आसान नहीं होगा.

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