Loksabha Elections 2024: 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए ने लगातार दूसरी बार बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए ऐतिहासिक जीत हासिल की. जब भी इन चुनावों का जिक्र होता है तो इसका श्रेय मोदी लहर को दिया जाता है. हालांकि सूचना के अधिकार के तहत एक कार्यकर्ता ने 2019 लोकसभा चुनावों को लेकर जो जानकारी जुटाई है वो इन चुनावों और उसके नतीजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग (EC) को असमान्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में भारी खराबी का सामना करना पड़ा. वोटिंग से पहले मशीनों की तकनीकी जांच की गई जिसे पहले स्तर की जांच (FLC) भी कहते हैं, इस दौरान कई राज्यों ने VVPAT और कंट्रोल यूनिट्स (CU) में खराबी की रिपोर्टें दर्ज की. खराबी की यह दर कुछ मामलों में 30% तक पहुंची थी जो कि स्वीकार्य लिमिट से ज्यादा है.
आरटीआई से मिली इस जानकारी ने चुनाव प्रोसेस पर ही सवाल खड़े कर दिये हैं. विपक्षी दल और उसके कार्यकर्ता पहले ही कई बार चुनावी नतीजों में हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ चुके हैं और हेराफेरी की आशंका जता चुके हैं. ऐसे में यह सूचना एक बार फिर से नतीजों में हेराफेरी की आशंकाओं को हवा दे सकती है. इतना ही नहीं आगामी लोकसभा चुनावों में नतीजों की विश्वनीयता पर भी सवालों का खड़ा होना लाजमी है.
यह ईवीएम की बैलेट यूनिट (BU) और कंट्रोल यूनिट (CU) के साथ-साथ वोटर-वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की प्रारंभिक तकनीकी परीक्षा है. यह प्रोसेस जिला चुनाव अधिकारी (DEO) के देखरेख में छह महीने पहले जिला स्तर पर इंजीनियरों द्वारा की जाती है. यदि FLC के दौरान कोई EVM भाग खराब हो जाता है, तो उसे मरम्मत के लिए मैन्युफैक्चर्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) या इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) को वापस कर दिया जाता है. पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान, वोटिंग प्रोसेस के दौरान EVM के खराब होने की घटनाओं ने राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया था.
राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल के निदेशक वेंकटेश नायक ने ये आरटीआई फाइल की थी और उनको मिले डॉक्यूमेंट्स पता चलता है कि पूरे FLC प्रोसेस के दौरान राज्यों से VVPAT और CU के टूटने की रिपोर्ट सामान्य से ज्यादा थी और यह तब भी जारी रहीं जब उम्मीदवारों के नाम और उनके चुनाव चिन्ह, वोटिंग डेट्स के रिकॉर्ड मशीनों में डाले जा रहे थे.
इस रिपोर्ट के अनुसार नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और केरल सहित कई राज्य मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) कार्यालय के अधिकारियों ने हाई फेल्योर रेट के कारण EC से अधिक मशीनों का अनुरोध किया. हालांकि EC ने आधिकारिक रूप से किसी निश्चित रिजेक्शन रेट को उच्च या स्वीकार्य के रूप में परिभाषित करने के लिए कोई कट-ऑफ रेंज घोषित नहीं किया है.
सूत्रों के अनुसार, BU, CU और VVPAT के लिए 5% तक की रिजेक्शन रेट को स्वीकार्य माना जाता है. हालांकि, कुछ राज्य FLC के दौरान 30% तक की दर की रिपोर्ट कर रहे थे. उदाहरण के लिए, 1 नवंबर, 2018 को उत्तराखंड के सहायक सीईओ से प्राप्त पहले स्तर की जांच की एक स्थिति रिपोर्ट में नियंत्रण इकाइयों के लिए 38% की रिजेक्शन रेट दिखाई गई.
21 दिसंबर, 2018 को, दिल्ली सीईओ कार्यालय ने ईसी को लिखा, जिसमें दक्षिण, उत्तर-पश्चिम और पूर्वी जिलों में किए गए FLC के दौरान VVPAT की उच्च विफलता दर को चिन्हित किया गया और प्रतिस्थापन के लिए अतिरिक्त इकाइयों की मांग की गई.
इसी तरह, अंडमान के सीईओ कार्यालय ने मार्च 2019 के पहले सप्ताह में ईसी से इसी तरह का अनुरोध किया, जिसमें अतिरिक्त VVPAT का अनुरोध किया गया था, जिसमें कहा गया था कि प्रशिक्षण और जागरूकता के लिए उपयोग किए जा रहे आधे से अधिक VVPAT खराब हो गए थे.