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खतरे में 'कोटा फैक्ट्री', जानें कैसे बंद हो सकता है अरबों का बिजनेस?

Kota Coaching Business: कोटा, जो कभी मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए भारत का प्रवेश द्वार माना जाता था, अब एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. इस साल, शहर में कोचिंग करने वाले छात्रों की संख्या आधे से भी कम हो गई है, जिससे हॉस्टल, दुकानों और अन्य व्यवसायों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है.

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खतरे में 'कोटा फैक्ट्री', जानें कैसे बंद हो सकता है अरबों का बिजनेस?
Courtesy: IDL

Kota Coaching Business: देशभर में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए मशहूर कोटा शहर, छात्रों की भारी कमी का सामना कर रहा है. यह अभूतपूर्व घटना न केवल कोचिंग उद्योग के लिए बल्कि पूरे शहर की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है.

छात्रों की कमी के पीछे की वजहें

अन्य राज्यों में कोचिंग संस्थानों का खुलना: पहले, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के छात्र कोटा आकर कोचिंग करते थे. लेकिन अब, इन राज्यों में भी कई बेहतरीन कोचिंग संस्थान खुल गए हैं, जिसके कारण छात्रों को अब दूरदराज के शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं है.

ऑनलाइन शिक्षा का बढ़ता प्रभाव: इंटरनेट और प्रौद्योगिकी के विकास ने शिक्षा को पहले से कहीं अधिक सुलभ बना दिया है. अब छात्र घर बैठे ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं. YouTube, Unacademy, Vedantu, Byju's जैसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म छात्रों को कोचिंग संस्थानों पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम कर रहे हैं.

महंगाई: कोटा में रहने और पढ़ाई करने की बढ़ती लागत भी छात्रों को दूर कर रही है. हॉस्टल, भोजन, किताबें और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बोझ बन रही है. कई छात्र अब कम खर्चीले शहरों में शिक्षा प्राप्त करने का विकल्प चुन रहे हैं.

कोविड-19 महामारी: महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा का बढ़ता महत्व छात्रों की मानसिकता में बदलाव ला रहा है. कई छात्र अब घर बैठे ही पढ़ाई करना पसंद करते हैं, जिससे कोटा जैसे ऑफलाइन शिक्षा केंद्रों पर प्रभाव पड़ा है.

अर्थव्यवस्था पर क्या होगा प्रभाव?

छात्रों की कमी का असर कोटा की अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर पड़ रहा है:

  • हॉस्टल उद्योग पर संकट: हॉस्टल व्यवसाय कोटा की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. लेकिन छात्रों की कमी के कारण, कई हॉस्टल खाली पड़े हैं और किराए में भारी गिरावट आई है. हॉस्टल मालिकों को अपना व्यवसाय चलाने में मुश्किल हो रही है, जिससे नौकरी छूटने का खतरा भी बढ़ गया है.
  • दुकानों और रेस्टोरेंट पर मंदी: कोचिंग छात्रों पर निर्भर दुकानों और रेस्टोरेंट की बिक्री में भी गिरावट आई है. छात्रों की कमी के कारण दुकानदारों को कम मुनाफा हो रहा है, जिससे वे अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर हो रहे हैं.
  • परिवहन उद्योग में सुस्ती: ऑटो, टैक्सी और बसों जैसे परिवहन साधनों की मांग में भी कमी आई है. छात्रों की कमी के कारण इन वाहनों को कम किराएदार मिल रहे हैं, जिससे ड्राइवरों और कर्मचारियों की आय पर असर पड़ रहा है.
  • रोजगार पर प्रभाव: कोचिंग संस्थानों, हॉस्टल, दुकानों, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायों में काम करने वाले हजारों लोगों की आजीविका खतरे में है. छात्रों की कमी के कारण कई लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है.

क्या हो सकता है समाधान?

इस विकट परिस्थिति से बाहर निकलने के लिए, कोटा को अपनी रणनीति में बदलाव लाने की आवश्यकता है:

विविधीकरण: कोटा को केवल कोचिंग हब के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है. कोटा को अपनी अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान करने के लिए  नए विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और इनोवेशन हब्स की स्थापना करनी चाहिए. यह न सिर्फ छात्रों को आकर्षित करेगा बल्कि उन्हें कोचिंग के बाद नौकरी या उद्यमिता के विकल्प भी देगा.

क्वालिटी एजुकेशन पर फोकस: कोचिंग संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. नई तकनीक अपनाने, अनुभवी शिक्षकों को नियुक्त करने और उचित शुल्क निर्धारण से छात्रों का विश्वास जीता जा सकता है.

ऑनलाइन शिक्षा का लाभ उठाना: कोचिंग संस्थान ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते चलन का लाभ उठा सकते हैं. वे ऑनलाइन कोर्स और कक्षाएं देकर अपने दायरे को व्यापक कर सकते हैं. इससे छात्रों को स्थान की बाध्यता खत्म हो जाएगी.

सरकारी सहयोग: राज्य सरकार को कोटा की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद करनी चाहिए. रियायती हॉस्टल, रोजगार के अवसर पैदा करना और आधारभूत संरचना में सुधार जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.

कोटा के सामने एक चुनौती है. यह समय है कि कोटा खुद को नये सिरे से गढ़े. कोचिंग के साथ-साथ शिक्षा के दूसरे आयामों को विकसित कर यह शहर फिर से छात्रों का पसंदीदा शिक्षा केंद्र बन सकता है. यह बदलाव न सिर्फ कोटा की अर्थव्यवस्था को बचाएगा बल्कि यहां पढ़ने वाले छात्रों को भी भविष्य के लिए बेहतर विकल्प देगा.