केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को एकल न्यायाधीश की पीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के 16 निलंबित छात्रों को 4 नवंबर से शुरू होने वाली परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी गई थी. ये सभी छात्र स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े हैं.
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस ने विश्वविद्यालय की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया. विश्वविद्यालय का कहना था कि निलंबित छात्रों की उपस्थिति निर्धारित मानकों के मुताबिक नहीं थी और उन्होंने आंतरिक परीक्षाएं भी पास नहीं की थीं. छात्रों ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
इन छात्रों को 13 अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करने के बाद निलंबित किया गया था. प्रदर्शन के दौरान कुलपति का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया गया था. आरोप है कि इस दौरान कुलपति के साथ धक्का-मुक्की हुई और उनकी कार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की गई.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 2017 के एक पुराने निर्णय का हवाला दिया. उस फैसले में कहा गया था कि शैक्षणिक संस्थानों में धरना, सत्याग्रह या भूख हड़ताल जैसी गतिविधियों में शामिल होने वाले छात्रों को निष्कासित या संस्थान से बाहर किया जा सकता है.
अदालत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान शिक्षा देने के लिए हैं, राजनीति करने के लिए नहीं. राजनीतिक दल अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए संस्थानों को बंधक नहीं बना सकते और न ही अन्य छात्रों के शिक्षा पाने के अधिकार में बाधा डाल सकते हैं.
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि छात्रों की याचिका में ऐसा कोई पर्याप्त आधार नहीं दिया गया था, जिससे उन्हें परीक्षा में बैठने का अधिकार मिलता. एकल न्यायाधीश का अंतरिम आदेश विश्वविद्यालय को उसके निर्धारित नियमों के विपरीत काम करने का निर्देश देता था, जो कानूनी रूप से उचित नहीं है.