केंद्र सरकार देश की सांख्यिकीय व्यवस्था को डिजिटल और आधुनिक बनाने की तैयारी कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को विकसित भारत पहल के लिए सांख्यिकीय परिवर्तन, विश्लेषण एवं अनुसंधान (VISTAR) योजना को मंजूरी दी.
इस योजना पर वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल 4,371.10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसका उद्देश्य सरकारी नीतियों और योजनाओं को सटीक आंकड़ों के आधार पर तैयार करना है. इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का भी इस्तेमाल होगा.
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) अब 16वें वित्त आयोग के चक्र में 43 के बजाय 59 बड़े सर्वेक्षण कराएगा. इनमें अर्थव्यवस्था, रोजगार, स्वास्थ्य और सेवाओं से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे.
इसके अलावा सेवाओं के उत्पादन का हेडलाइन इंडेक्स और असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का इंडेक्स भी तैयार किया जाएगा. डेटा जुटाने के लिए मोबाइल फोन, स्कैनर और ई-कॉमर्स जैसे नए स्रोतों का इस्तेमाल होगा.
➣ #Cabinet approves Capex Support Scheme to promote Critical Mineral Processing ➣ This will give huge benefit to manufacturing sector including electronics, semiconductor, battery, defence, heavy equipment, machinery etc, benefitting to all industries utilizing critical minerals. -Union Minister @AshwiniVaishnaw #CabinetDecisions
— PIB India (@PIB_India) November 4, 2026
योजना के दूसरे चरण में राज्यों को SSS 2.0 के तहत आर्थिक मदद दी जाएगी. इससे जिला स्तर और 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के आंकड़े जुटाए जा सकेंगे. राज्य अपनी जीडीपी और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का बेहतर आकलन भी कर पाएंगे.
VISTAR योजना के तहत आठवीं आर्थिक जनगणना भी कराई जाएगी. इसमें गांव और वार्ड स्तर पर गैर-कृषि क्षेत्र की दुकानों, कारखानों, अन्य प्रतिष्ठानों और उनमें काम करने वाले लोगों की गणना होगी. इससे देश की अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र के योगदान का आकलन करने में मदद मिलेगी. योजना में युवाओं के लिए इंटर्नशिप और शोध प्रस्तावों के माध्यम से रिसर्च के अवसर उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था है.