menu-icon
India Daily

'महिलाओं को अपने घरों तक रहना चाहिए...', केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के बयान से मचा बवाल

केरल में महिलाओं की सार्वजनिक मंचों पर भागीदारी को लेकर धार्मिक संगठन के एक परिपत्र के बाद विवाद गहरा गया है. समस्त केरल जमीयतुल उलमा के महासचिव कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने अपने संगठन के रुख का बचाव करते हुए कहा कि इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दे का प्रावधान है और उन्हें घर की सीमा में रहना चाहिए.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
'महिलाओं को अपने घरों तक रहना चाहिए...', केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के बयान से मचा बवाल
Courtesy: Pinterest

कोच्चि में रविवार को आयोजित एक इस्लामी सम्मेलन में कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने महिलाओं की सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं में महिलाओं के लिए पर्दे का प्रावधान किया गया है और महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है.

उन्होंने दावा किया कि पवित्र कुरान में महिलाओं के घर के भीतर रहने और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने की बात कही गई है. कंथापुरम ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर धार्मिक शिक्षाओं के आधार पर अपनी बात आगे भी रखते रहेंगे.

किस परिपत्र से शुरू हुआ विवाद?

कंथापुरम की यह टिप्पणी समस्त केरल जमीयतुल उलमा के एक गुट की ओर से पिछले सप्ताह जारी किए गए परिपत्र के बाद सामने आई है. परिपत्र संगठन के अध्यक्ष ई सुलेमान मुसलियार और महासचिव कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की ओर से जारी किया गया था. इसमें धार्मिक समारोहों और कार्यक्रमों के आयोजन को निर्धारित धार्मिक सीमाओं के भीतर रखने की बात कही गई थी. साथ ही महिलाओं को पुरुषों के साथ मंच साझा नहीं करने और सार्वजनिक स्थानों पर पुरुषों के साथ दिखाई नहीं देने का निर्देश दिया गया था.

महिला नेताओं ने उठाए सवाल

परिपत्र सामने आने के बाद इसकी आलोचना शुरू हो गई. कई महिला राजनीतिक नेताओं ने संगठन के निर्देशों और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भूमिका पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए. आलोचकों का कहना है कि महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी को सीमित करने वाले ऐसे निर्देश उनके सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं. इसी वजह से केरल में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है.

कंथापुरम ने अपने संगठन की स्थिति का बचाव करते हुए कहा कि समस्त से जुड़े धार्मिक विद्वान लंबे समय से इन शिक्षाओं का पालन और प्रचार करते आए हैं. उन्होंने कहा कि करीब एक सदी से संगठन के विद्वान महिलाओं से जुड़ी इन धार्मिक मान्यताओं को सामने रखते रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि धर्म का अध्ययन करने वाले विद्वानों की जिम्मेदारी है कि वे इन मुद्दों पर अपनी बात रखें. कंथापुरम ने संकेत दिया कि विरोध और आलोचनाओं के बावजूद वह अपनी स्थिति व्यक्त करते रहेंगे.