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कश्मीर से 'सफेद चादर' गायब! बर्फ तो छोड़िए... पानी तक के लिए होने वाला है गंभीर संकट

खेलो इंडिया विंडर गेम्स को स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. इतना ही नहीं हिमालय के मध्य से निचले इलाकों में भी बर्फ की कमी के कारण पर्यटन और खेल पर असर पड़ रहा है.

Naresh Chaudhary
कश्मीर से 'सफेद चादर' गायब! बर्फ तो छोड़िए... पानी तक के लिए होने वाला है गंभीर संकट

हाइलाइट्स

  • कश्मीर में बर्फबारी नहीं हुई तो नदियों को नहीं मिलेगा पानी, पड़ेगा सूखा
  • कारगिल का द्रास सेक्टर भी हुआ गर्म, गुलमर्ग में बर्फबारी न के बराबर
  • कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के विंटर टूरिज्म पर छाए संकट के बादल

Kashmir Weather: भारत की जन्नत कहे जाने वाली कश्मीर घाटी के हालात बदलते जा रहे हैं. मौसमी लिहाज से यहां कई गंभीर परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं. यहां इस सीजन में बिछने वाली सफेद चादर (बर्फबारी) गायब हो गई है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले में हालात और ज्यादा चिंताजनक होने वाले हैं. यहां बर्फ तो छोड़िए, पानी तक के लिए लड़ाई जैसा माहौल हो सकता है. इस बार न के बराबर हुई बर्फबारी के बाद मौसम वैज्ञानियों ने चिंता जताई है. बर्फबारी न होने से घाटी के पर्यटन उद्योग को भी बड़ा झटका लगता नजर आ रहा है. 

कश्मीर की बर्फबारी के बिना सर्दियों ने पर्यटन को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. हालात ये हैं कि खेलो इंडिया विंडर गेम्स को स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. इतना ही नहीं हिमालय के मध्य से निचले इलाकों में भी बर्फ की कमी के कारण पर्यटन और खेल पर असर पड़ रहा है. जानकारों का कहना है कि आने वाले गर्मी के मौसम में जम्मू-कश्मीर में पानी की कमी हो सकती है, क्योंकि बर्फ से झेलम नदी में पानी आता है और फिर इसकी सहायक नदियां पोषित होती है. 

बर्फबारी नहीं हुई तो नदियों को नहीं मिलेगा पानी

श्रीनगर में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक मुख्तार अहमद ने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा है कि अगली गर्मियों में स्थिति भयानक हो सकती है, क्योंकि बर्फ से ढकी नदियों को पानी देने के लिए पर्याप्त पानी नहीं होगा. इसके बाद दीर्घकालिक खराब नतीजे सामने आ सकते हैं. स्काईमेट में मेट्रोलॉजी और जलवायु परिवर्तन डिपार्टमेंट के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा है कि बर्फबारी कम होने या न होने से ग्लेशियर रिचार्ज नहीं होंगे और फिर तेजी से पिघलेंगे. उन्होंने कहा कि अगर यही आलम रहा तो धीरे-धीरे बर्फीली नदियां सूखने लगेंगी.

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर, सोनमर्ग और गुलमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों पर भी बर्फबारी न के बराबर हुई है. यही हाल हिमाचल प्रदेश के शिमला और मनाली का भी है. जहां बर्फबारी नहीं हुई है. यहां तक ​​कि उत्तराखंड के औली में भी अभी तक बर्फबारी नहीं हुई है. दूसरी ओर जम्मू और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में पारा बढ़ गया. रविवार 14 जनवरी को यहां अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं देश की राजधानी दिल्ली का मौसम कश्मीर से कहीं नीचे था.

कारगिल का द्रास सेक्टर भी हुआ गर्म, गुलमर्ग में बर्फबारी न के बराबर

सिर्फ कश्मीर घाटी ही नहीं, लद्दाख में भी कुछ जगहों पर सामान्य से ज्यादा तापमान दर्ज किया गया है. कारगिल के द्रास सेक्टर में रविवार 14 जनवरी को तापमान 9.5 डिग्री सेल्सियस था, जो जम्मू के अधिकतम तापमान के करीब बराबर था. इस बात पर सभी ने ध्यान दिया कि कश्मीर घाटी, विशेष रूप से पर्यटन स्थल गुलमर्ग में इस सर्दी में ज्यादा बर्फबारी नहीं हुई. 

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर लिखा कि मैंने गुलमर्ग को सर्दियों में इतना सूखा कभी नहीं देखा. अगर यहां जल्द ही बर्फबारी नहीं हुई तो गर्मियों में काफी दिक्कत होने वाली है. उन्होंने कुछ तस्वीरें भी शेयर की है. इनमें दुनिया के सबसे ऊंचे स्की स्पॉट की स्थिति की तुलना पिछले वर्षों से की गई है. बताया जाता है कि सर्दियों की सबसे ठंडी 40 दिन की अवधि तक रहती है. इस समय को चिल्लई कलां कहा जाता है. ये समय अमूमन 21 दिसंबर से शुरू हो जाता है. 

कश्मीर के विंटर टूरिज्म पर छाए संकट के बादल

कश्मीर के गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों की ताजा और बेहद गंभीर तस्वीरें सोशल मीडिया पर आ रही हैं. इन तस्वीरों में बर्फबारी गायब है. क्षेत्र में हॉस्पिटेलिटी उद्योग और एडवेंचर गेम्स खेलों से जुड़े लोग सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. बर्फबारी की कमी के कारण होटल बुकिंग रद्द हो रही हैं. खासकर गुलमर्ग में सर्दियों के दौरान बर्फबारी देखने के लिए काफी संख्या में लोग आते हैं. 

उत्तरी कश्मीर के पहाड़ी रिसॉर्ट गुलमर्ग में जनवरी में होने वाली विंटर गेम्स भी प्रभावित हैं, जो साल की शुरुआत के दौरान बर्फ से ढका रहता था. द इकोनॉमिक टाइम्स ने ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर के अध्यक्ष रूफ ट्रैंबू के हवाले से कहा कि इस साल गुलमर्ग में पर्यटकों की संख्या में 70% की गिरावट देखी गई है. जम्मू-कश्मीर में व्यापारियों की परेशानी इस बात से बढ़ गई है कि स्थानीय लोगों ने कुछ साल पहले एडवेंचर गेम्स में बड़ा निवेश किया था. अब मौसम की मार के कारण उनके निवेश की भरपाई भी मुश्किल हो रही है. 

खेलो इंडिया विंटर गेम्स का मजा हुआ किरकिरा

जैसे-जैसे खेलो इंडिया विंटर गेम्स का 2024 संस्करण नजदीक आ रहा है, कश्मीर में मेजबान शहर गुलमर्ग निराश होता दिख रहा है. ये इलाका आमतौर पर इस सीजन में बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है. सूखे बंजर नजारे को देखकर खिलाड़ियों, कोचों और अन्य संबंधित लोगों को परेशान कर दिया है. खेलो इंडिया विंटर गेम्स के पिछले संस्करण, 2021 और 2022, की सह-मेजबानी लद्दाख में गुलमर्ग और लेह की ओर से की गई थी.

हालांकि, लेह और औली में भी तस्वीर अलग नहीं है. जोजिला दर्रे समेत क्षेत्र के ऊपरी हिस्सों को छोड़कर क्षेत्र एक इंच भी वर्षा के बिना उप-शून्य तापमान में जम रहा है. उत्तराखंड के एक विंटर गेम्स स्पॉट औली में अब तक कोई बर्फबारी नहीं हुई है. हालांकि Accuweather.com का डेटा आने वाले दिनों में कुछ वर्षा की भविष्यवाणी कर रहा है.

भारतीय खेल प्राधिकरण, खेल मंत्रालय, महासंघ और संघों की हाल ही में बैठक हुई है. बैठक में इन सभी समस्याओं के समाधान पर चर्चा हुई है. ट्रैंबू ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इसलिए हमें लगता है, हमें खेलों को पुनर्निर्धारित करना पड़ सकता है. यदि हमारे इनपुट के अनुसार सब कुछ ठीक रहा, तो हम 10-15 फरवरी के बीच अच्छी बर्फबारी की उम्मीद कर रहे हैं, इसलिए हम गेम्स को फरवरी के मध्य में आयोजित किया जा सकता है. 

बारिश नहीं हुई तो नदियों का क्या होगा हाल? 

बर्फबारी की कमी क्षेत्र और उसके बाहर जल चक्र को प्रभावित कर सकती है. श्रीनगर में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक मुख्तार अहमद ने कहा कि इस सर्दी में तापमान 15-16 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने के साथ यह ग्लेशियरों के अत्यधिक सिकुड़ने में योगदान देगा. यह सभी हिमालयी नदियों को पानी देने वाले ग्लेशियरों पर भी तनाव पैदा कर रहा है.

आखिर क्यों नहीं हो रही है बर्फबारी? 

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कश्मीर घाटी में दिसंबर 2023 में 79% बारिश की कमी दर्ज की गई है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी साफ कर दिया है कि 15 जनवरी तक आसमान साफ ​​रहेगा. आईएमडी वैज्ञानिक सोमा सेन रॉय ने कहा कि इस विसंगति को अल नीनो से जोड़ा जा सकता है, जो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के गर्म होने की विशेषता वाली जलवायु घटना है, जिसका वैश्विक मौसम पैटर्न पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है.