मुंबई: BMC चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद सितंबर 2020 की एक घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई है. उस समय बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई स्थित दफ्तर पर मुंबई महानगर पालिका यानी बीएमसी ने कार्रवाई करते हुए तोड़फोड़ की थी. इस कार्रवाई के बाद कंगना आनन-फानन में मुंबई पहुंचकर उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला था.
कंगना का वह बयान अब फिर से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. आज यानी 16 जनवरी को ही BMC चुनाव का रिजल्ट घोषित हुआ है, जिसमें ठाकरे बंधुओं को करारी हार का सामना करना पड़ा है.
BMC की कार्रवाई के बाद कंगना रनौत ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने उद्धव ठाकरे को खुली चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि आज मेरा घर टूटा है, कल तुम्हारा घमंड टूटेगा. कंगना ने इसे समय का खेल बताते हुए कहा था कि वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता. अभिनेत्री के अनुसार, मुझे पता था कि कश्मीरी पंडितों पर क्या बीती होगी आज मैंने महसूस किया है... जय हिंद, जय महाराष्ट्र.' उस समय यह बयान काफी विवादों में रहा था और राजनीतिक हलकों में भी इसकी काफी चर्चा हुई थी. हालांकि, बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कंगना के दफ्तर पर हो रही कार्रवाई पर रोक लगा दी थी.
"Aaj mera ghar toota hai, kal tera ghamand tootega"🔥
When Uddhav Thackeray was CM, he weaponized BMC to raze Kangana Ranaut's Mumbai bungalow.
Today, Queen Kangana's curse has finally crushed the Thackeray dynasty's political reign. Karma has its own timing🔥#BMCResults pic.twitter.com/MJ6LYoYLlY— AbhishekkkK (@Abhishekkkk10) January 16, 2026Also Read
अब करीब छह साल बाद बीएमसी चुनाव के नतीजों के बाद कंगना का पुराना बयान एक बार फिर लोगों को याद आ रहा है. 2026 के बीएमसी चुनाव में बीजेपी और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के गठबंधन को बहुमत मिलता नजर आ रहा है. 227 सीटों वाली बीएमसी में बीजेपी गठबंधन लगभग 130 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. यह नतीजे ठाकरे परिवार के लिए बड़ा झटका माने जा रहे हैं.
चुनाव नतीजों से साफ है कि उद्धव ठाकरे को राज ठाकरे के साथ गठबंधन करने का भी खास फायदा नहीं मिला. माना जा रहा है कि इस गठजोड़ ने उल्टा नुकसान पहुंचाया. राज्य की 29 नगर निगमों में बीजेपी शानदार प्रदर्शन करती दिख रही है. पहली बार ऐसा माना जा रहा है कि मुंबई में बीजेपी का मेयर बनने जा रहा है, जो शिवसेना के गढ़ में बड़ी राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है.
इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं ने अपने अभियान का केंद्र 'मराठी मानूस' को बनाया था. रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारतीय, गुजराती और अन्य समुदायों का बड़ा हिस्सा बीजेपी के पक्ष में मजबूती से खड़ा नजर आया.महायुति ने इन गैर-मराठी वोटरों को अपने साथ जोड़ने में सफलता हासिल की, जबकि ठाकरे गठबंधन का फोकस सीमित रह गया.