होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बीच भारत ने राहत भरी जानकारी दी है. सरकारी सूत्रों के अनुसार देश के पास कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन का ऐसा भंडार है, जो लगभग 25 दिनों तक जरूरतें पूरी कर सकता है. साथ ही फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है. हालांकि सरकार हालात पर लगातार नजर रखे हुए है.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को शिपिंग के लिए बंद कर दिया गया है. चेतावनी दी गई है कि गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमलों के बाद तनाव और बढ़ गया है. जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों की ऊर्जा संरचनाओं और गुजरते टैंकरों पर हमले किए हैं.
इन घटनाओं के बीच वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें लगातार तीसरे दिन बढ़ीं. ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा, जबकि इससे पहले यह 82 डॉलर तक पहुंच गया था. अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 72 डॉलर प्रति बैरल के पार गया. बढ़ते जोखिम के कारण शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम भी तेजी से बढ़े हैं.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत वैकल्पिक देशों से कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी आयात के विकल्प तलाश रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने आयात स्रोतों में विविधता लाई है, जिससे निर्भरता कम हुई है. कई आपूर्तियां अब ऐसे मार्गों से आ रही हैं जो होर्मुज पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया कि ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित है. मंत्रालय ने 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो देशभर में ईंधन भंडार और आपूर्ति की निगरानी कर रहा है. सरकार ने कहा कि उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि हैं और फिलहाल पेट्रोल-डीजल कीमतों में बदलाव की संभावना नहीं है. आगे का फैसला हालात पर निर्भर करेगा.