नई दिल्ली: असम की चुनावी सरगर्मी तेज होते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने मोहरों की पहली चाल चल दी है. पार्टी ने राज्य की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 42 उम्मीदवारों की पहली फेहरिस्त सार्वजनिक की है. इस सूची में अनुभव और क्षेत्रीय समीकरणों का तालमेल बिठाने की कोशिश की गई है. चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की संभावित घोषणा से पहले कांग्रेस ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है. पार्टी का लक्ष्य पिछले चुनावों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सत्ता में वापसी करना है.
कांग्रेस की इस सूची में सबसे चर्चित नाम गौरव गोगोई का है. लोकसभा में विपक्ष के उपनेता और जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई अब जोरहाट विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे. उनके चुनाव लड़ने से इस क्षेत्र में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है. गोगोई के अलावा पार्टी ने अभिजीत पॉल को सिलचर और इंद्रनील पेगु को माजुली जैसी महत्वपूर्ण सीटों से उम्मीदवार बनाया है. इन दिग्गजों की साख अब मतदाताओं के हाथ में है.
असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली लिस्ट 👇 pic.twitter.com/6UWsc2WAm7
— Congress (@INCIndia) March 3, 2026Also Read
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दिसपुर विधानसभा सीट से मीरा बोरठाकुर गोस्वामी को टिकट देकर पार्टी ने राजधानी क्षेत्र में अपनी दावेदारी पेश की है. वहीं बरचल्ला सीट से अनुभवी नेता रिपुन बोरा को मैदान में उतारा गया है. कांग्रेस का मानना है कि इन 42 सीटों पर उसके उम्मीदवारों की स्थिति काफी मजबूत है और वे भाजपा गठबंधन को कड़ी टक्कर देंगे. पार्टी कार्यकर्ताओं में उम्मीदवारों के एलान के बाद एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है.
असम की मौजूदा विधानसभा के आंकड़ों पर गौर करें तो सत्ता पक्ष का पलड़ा काफी भारी दिखता है. वर्तमान में भाजपा के पास 64 विधायक हैं. जबकि उसके सहयोगी दलों असम गण परिषद के पास 9. यूपीपीएल के पास 7 और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के पास 3 सदस्य हैं. विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस 26 विधायकों के साथ मुख्य भूमिका में है. इसके अलावा एआईयूडीएफ के 15 और सीपीआई (एम) का एक विधायक सदन में मौजूद है.
साल 2021 के चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने 75 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी. यह राज्य में पहली बार हुआ जब किसी गैर-कांग्रेसी गठबंधन ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की. हालांकि. कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोत गठबंधन ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था और 50 सीटें हासिल की थीं. यह आंकड़ा 2016 के 26 सीटों के मुकाबले काफी बेहतर था. जिसे कांग्रेस इस बार बहुमत में बदलने की उम्मीद कर रही है.