नई दिल्ली: देशभर में आज होली का रंगीन उत्सव छाया हुआ है. चारों तरफ पानी की पिचकारियां, गुलाल की उड़ती धूल और हंसी-ठिठोली का माहौल है. लोग उत्साह में फोन जेब में रखकर या हाथ में लेकर खेलते हैं, लेकिन एक छोटी सी लापरवाही महंगे स्मार्टफोन को बर्बाद कर सकती है. मार्केट में कई फोन IP रेटिंग के साथ 'वॉटर रेसिस्टेंट' का दावा करते हैं, पर क्या ये होली के रंगों और गंदे पानी से सच में बचाव करते हैं? आइए समझते हैं कि IP रेटिंग का असली मतलब क्या है और क्यों होली के दौरान फोन को एक्स्ट्रा सावधानी की जरूरत पड़ती है.
IP रेटिंग फोन की धूल और पानी से सुरक्षा की क्षमता बताती है. पहला नंबर धूल से बचाव (6 मतलब पूरी तरह धूलप्रूफ) और दूसरा पानी से (8 मतलब 1.5 मीटर गहराई तक 30 मिनट साफ पानी में डूब सकता है). लेकिन ये लैब टेस्ट साफ पानी के लिए हैं. कोई फोन 100% वॉटरप्रूफ नहीं होता, सिर्फ रेसिस्टेंट. समय के साथ सील कमजोर हो सकती है.
होली में इस्तेमाल होने वाले रंग और गुलाल में रसायन, मिका पाउडर और डाई होते हैं. ये स्पीकर ग्रिल, चार्जिंग पोर्ट, माइक्रोफोन में घुसकर केमिकल रिएक्शन कर सकते हैं. साफ पानी से अलग ये ज्यादा नुकसानदायक हैं. यहां तक कि IP68 फोन भी ऐसे रंगों से प्रभावित हो सकता है. वारंटी में लिक्विड डैमेज कवर नहीं होता.
ज्यादातर ब्रांड जैसे एप्पल, सैमसंग आदि लिक्विड डैमेज को वारंटी से बाहर रखते हैं, भले फोन IP68 हो. क्योंकि रेटिंग सिर्फ नियंत्रित परिस्थितियों के लिए है, न कि त्योहारों के रंगीन पानी या केमिकल्स के लिए. अगर फोन खराब होता है तो सर्विस सेंटर में लिक्विड इंडिकेटर चेक करके डैमेज साबित कर देते हैं.
होली खेलते वक्त फोन को वॉटरप्रूफ पाउच या जिप-लॉक बैग में रखें. जेब में न डालें जहां रंग घुस सकता है. खेलने के बाद साफ पानी से पोंछकर सुखाएं, लेकिन गीला न छोड़ें. केमिकल रंगों से बचें और अगर फोन गीला हो जाए तो तुरंत बंद कर चावल में रखें. सावधानी से उत्सव मनाएं, फोन भी बचेगा.